ओबरा। तापीय परियोजना के ब ताप विद्युत गृह में 14 अक्टूबर की भोर में हुए अग्निकांड की घटना के मामले में उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक सेंथिल पांडियन सी ने अधीक्षण अभियंता मुख्यालय इं. सुरेश को निलंबित कर दिया है। आरोप है कि ओबरा ताप विद्युत गृह को उनके द्वारा केबल गैलरी में फायर फाइटिंग सिस्टम लगाए जाने जैसे प्रकरण में अपने कर्तव्य एवं दायित्वों का भली भांति निर्वहन नहीं किया गया। उन्हें प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध अग्रेतर जांच एवं अनुशासनिक कार्रवाई किए जाने के लिए मुख्य अभियंता एवं परियोजना समन्वयक, अनपरा तापीय परियोजना से संबद्घ कर दिया है। अधीक्षण अभियंता मुख्यालय को निलंबित करने पर यूपी राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ने निगम प्रबंधन पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। एसई के निलंबन की निंदा किया है। मांग किया है कि अधीक्षण अभियंता मुख्यालय सहित पॉवर कारपोरेशन के बिजली अभियंताओं के किए गए सभी निलंबन आदेश तत्काल निरस्त किए जाएं। ऊर्जा निगमों की लगातार गिरती प्रतिष्ठा एवं हालत के दृष्टिगत सभी ऊर्जा निगमों का प्रबंधन अनुभवी तकनीकी बिजली विशेषज्ञों को तत्काल सौंपा जाए। ऊर्जा निगमों का एकीकरण किया जाए। अभियंता संघ के प्रांतीय अध्यक्ष इं. जीके मिश्र एवं ओबरा-पिपरी क्षेत्र के क्षेत्रीय सचिव इं. अदालत वर्मा ने जारी बयान में कहा कि विगत कुछ समय से ऊर्जा निगमों के प्रबंध निदेशकों ने विद्युत अभियंताओं के विरूद्ध निलंबन का अभियान सा चला रखा है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रबंधन में बैठे लोग अनुशासन, नलिंबन के नाम पर डर का वातावरण पैदा करना चाहतें हैं। डंडे के बल पर बिजली का कार्य एवं ऊर्जा निगमों का संचालन करना चाहते हैं। कहा कि केबल गैलरी में इकाइयों की स्थापना से ही फायर प्रोटेक्शन सिस्टम नहीं लगा था। पांचों इकाइयों के जीर्णोद्धार कार्य को जब फरवरी 2007 में करीब 1630 करोड़ में कराने के दौरान केबल गैलरी में फायर प्रोटेक्शन सिस्टम लगाने का प्रस्ताव परियोजना स्तर से निगम मुख्यालय को भेजा गया था, लेकिन इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को निगम प्रबंधन के तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों ने बीएचईएल के स्कोप से हटा दिया। चेताया कि अधीक्षण अभियंता इं. सुरेश सहित पॉवर कारपोरेशन के अन्य बिजली अभियंताओं का निलंबन वापस नहीं हुआ तो अभियंता संघ प्रदेश व्यापी आंदोलन करेगा।
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उठने लगे सवाल
ओबरा। अधीक्षण अभियंता के निलंबन के बाद अब तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों का कहना है कि जिस समय केबल गैलरी में अग्नि दुर्घटना हुई, उस समय 12वीं इकाई के जीर्णोद्धार के बाद संचालन के दौरान मौके पर पहले से ही फायर टेंडर व सीआईएसएफ के जवान तैनात थे। आग लगने की शुरुआत फायर टेंडर से महज 30 से 40 मीटर की दूरी पर ही हुई थी। ऐसे में तुरंत आग क्यों नहीं बुझाई गई। यदि समय रहते शुरूआत में ही आग को बुझा दिया गया होता तो शायद मुख्य नियंत्रण कक्ष, 12वीं, 13वीं यूनिट का स्विचगेयर व कंट्रोल रूम सहित अन्य एरिया को जलने से बचा लिया गया होता।