सीतापुर। फरियादियों को एक ही समस्या के लिए विभिन्न स्तरों पर समाधान के लिए गुहार लगाने के बाद भी राहत नहीं मिल रही है। इससे वह परेशान हैं। जिम्मेदारों की ओर बरती जा रही लापरवाही का खामियाजा पीड़ितों को भुगतना पड़ रहा है। कुछ को तो हाईकोर्ट में न्याय की गुहार लगानी पड़ रही है। ऐसे में शासन की मंशा पर अफसर खरे नहीं उतर रहे हैं।
फरियादी अपनी समस्या के समाधान के लिए तहसील समाधान दिवस के साथ ही आईजीआरएस, सीएम हेल्पलाइन सहित ब्लॉक से लेकर जिले तक के जिम्मेदारों के यहां अर्जी लगाते हैं, लेकिन इसके बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।
ऐसे में ही समस्या के लिए पीड़ित कई बार अफसरों की चौखट पर पहुंचते हैं। शिकायतें दर्ज कराते हैं पर समस्या जस की तस बनी रहती है। समाधान के माममें में विरोधाभासी आख्या लगाई जा रही हैं। शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंचे फरियादियों ने अमर उजाला से अपना दर्द बयां किया।
शिकायत के बाद भी नहीं रुका अवैध निर्माण
लहरपुर में समाधान दिवस में पहुंचे कटेसर के शिव भगवान ने बताया कि उसके सह खातेदार राजेश, निर्मल, चंद्रभाल हैं। आरोप है, उसकी भूमि पर नींव खोदकर जबरन निर्माण करना चाहते हैं। इनकी भूमि पीछे है। इसके पूर्व भी उन्होंने प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। एक बार फिर न्याय पाने की आशा में शिव भगवान ने मुख्य विकास अधिकारी से भूमि पर निर्माण व अवैध कब्जे को रोके जाने की मांग की है।
जनसुनवाई में लगाई गलत रिपोर्ट
ब्लाक एलिया के अल्लीपुर अल्लीरजा निवासी नंदराम ने बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि नहीं मिल रही है। जनसुनवाई के दौरान शिकायत करने पर उसमें गलत आख्या लगाई गई। 27 मार्च को लेखपाल की आख्या में पात्र किया गया था। पांच अप्रैल को सम्मान निधि घोषण पत्र आदि ऑनलाइन स्टेटस जमा किया गया। फिर भी अभी तक लाभ नहीं मिला है। पंजीकरण नंबर, बैंक खाता संख्या अंकित करने हुए सम्मान निधि की मांग के लिए अर्जी दी है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं रुका निर्माण
शहर कोतवाली क्षेत्र के माल रोड शिवपुरी निवासी हर्षवर्धन ने समाधान दिवस में अर्जी देकर कहा कि आईजीआरएस में शिकायत की थी। इसके बाद भी लोनियन पुरवा पूर्वी में खरीदी गई जमीन में जल निगम द्वारा कराए जा रहे पानी की टंकी का निर्माण कार्य नहीं रुका। इसके बाद हाईकोर्ट गया। डबल बेंच ने आदेश किया है, निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता है, जब तक पालिका यह साबित न कर दे कि यह भूखंड उसने कानूनन खरीद लिया है। स्टे की कॉपी लगाते हुए निर्माण कार्य रोकने की मांग की है।