सीतापुर। गर्भवती को सुरक्षित प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल में जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल में थायराइड की जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। हर महीने करीब 800 गर्भवती बिना थायराइड की जांच के वापस लौट रही हैं। गर्भवती महिलाएं बाहर से जांच करवाने का मजबूर हैं। इससे उनका इलाज का खर्च बढ़ रहा है।
हर माह करीब आठ सौ गर्भवती जांच के अभाव में अस्पताल से लौट रही हैं। जिला महिला अस्पताल में खून की जांच, अल्ट्रासाउंड सहित अन्य जांचों की सुविधा है लेकिन गर्भवती को जिस जांच की अधिक जरूरत है, उसकी सुविधा अस्पताल में नहीं है। चिकित्सकों का कहना है कि जब महिला गर्भवती हो जाती हैं तो उनकी थायराइड की जांच अनिवार्य रूप से कराई जाती है।
इससे उसका प्रसवकाल पूरी तरह से सुरक्षित रहता है। यह जांच गर्भवती होने के कुछ ही दिन बाद कराई जाती है। उसी के अनुसार महिला का इलाज चलता है। जिला महिला अस्पताल आने वाली महिलाओं को जांच की सुविधा मिलना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में जब अस्पताल में जांच की कोई सुविधा नहीं है तो चिकित्सक बाहर से जांच करवाने का परामर्श देते हैं।
बाहर से जांच करवाने पर करीब छह सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जिससे महिलाओं को काफी दिक्कतें आ रही हैं। इस सुविधा से वंचित हर माह करीब आठ सौ गर्भवती को अस्पताल के बाहर जाकर जांच करवानी पड़ रही है।
गर्भवती परेशान, करना पड़ रहा अधिक खर्च
प्रीती ने बताया कि जिला महिला अस्पताल में जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है। अस्पताल आई थी, मजबूरी में बाहर से जांच करवानी पड़ रही हैं। गीता ने बताया कि जिला महिला अस्पताल में कई अन्य जांचें नहीं हो पा रही हैं। अगर बाहर से करवाते है तो खर्च अधिक करना पड़ रहा है। सोनी मौर्या ने बताया कि अस्पताल में काफी दिनों से इलाज करवाने आ रही हूं। लेकिन जांच के अभाव में लौटना पड़ रहा है।
इसलिए जांच की होती है जरूरत
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुषमा कर्णवाल का कहना है कि गर्भवती की थायराइड की जांच बहुत जरूरी होती हैं। अगर थायराइड बढ़ जाती है तो गर्भवती के सामने कई समस्याएं आ जाती है। उसका हीमोग्लोबिन कम पड़ जाएगा। गर्भ में बच्चे की मौत हो जाएगी। बार-बार बच्चा गर्भ में आने के बाद ठहर नहीं पाएगा। बच्चा होने के बाद लगातार खून की ब्लीडिंग होनी शुरू हो जाएगी। उसको रोकना आसान नहीं होगा। अगर शुरुआत में ही थायराइड का पता चल जाता है, तो आसानी से उसे कंट्रोल करके महिला का सुरक्षित प्रसव करवाया जा सकता है।
रोजाना 25 मरीजों को पड़ती है जरूरत
जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 400 से 500 महिलाएं इलाज करवाने आती हैं। इसमें 20 से 25 महिलाओं को थायराइड जांच कराने की परामर्श दी जाती है। अस्पताल में जांच की सुविधा न होने से वे बाहर से जांच करवाती हैं। जिन मरीजों के पास बजट की कमी होती है, वह बिना जांच कराए ही इलाज कराया करती हैं।
नहीं है सुविधा
जिला महिला अस्पताल में थायराइड की जांच की सुविधा नहीं है। इसके लिए मरीजों का सैंपल लखनऊ भेजा जाता है। थायराइड जांच के लिए अलग से मशीन होती है। उसके लिए अस्पताल में अभी संसाधन नहीं है।
- डॉ. सुषमा कर्णवाल, सीएमएस जिला महिला अस्पताल