इमलिया सुल्तानपुर। क्षेत्र के सहरोई में बृहस्पतिवार सुबह एक किसान के खेत में वनरोज का शव क्षत-विक्षत अवस्था में मिला। सूचना पर आए वनकर्मियों ने बाघ के शिकार करने की पुष्टि की। घटनास्थल पर वनरोज और बाघ के बीच संघर्ष के निशान भी मिले हैं। बता दें कि सहरोई से आठ किलोमीटर दूर ढोलईखुर्द में भी एक बाघ की दहशत कायम है।
बीते एक माह से इमलिया सुल्तानपुर इलाके में बाघ की दहशत बनी हुई है। रोजहा, बिशुनपुर, ढोलई, शेरपुर, चांदूपुर, पिपरी के बाद सहरोई में भी बाघ ने दस्तक दे दी है। बृहस्पतिवार सुबह सहरोई निवासी हरगोविंद वर्मा के खेत में वनरोज का शव मिला। इसकी सूचना कचनार चौकी को दी गई। मौके पर पहुंचे चौकी प्रभारी अतुल शुक्ला ने वन विभाग को सूचना दी। वनरोज के शरीर का पिछला हिस्सा गायब था। बाकी शरीर पर नाखूनों के निशान थे।
खेत में वनरोज व बाघ की लड़ाई के निशान भी मिले। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। वन रेंजर हरगांव बीनू पाल ने बताया कि वनरोज का शिकार करने की सूचना मिली है। घाव व नाखूनों के निशान के आधार पर बाघ होने का ही अंदेशा है। ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
आखिरकार! जागा वन विभाग, पिंजरा लगाया, बकरी भी बांधी
इमलिया सुल्तानपुर। क्षेत्र के ढोलई खुर्द गांव में एक माह से बाघ की दहशत कायम है। अमर उजाला में खबर प्रकाशन के बाद बृहस्पतिवार को बाघ को पकड़ने के लिए इलाके में पिंजरा लगा दिया गया। बाघ को आकर्षित करने के लिए पिंजरे में एक बकरी भी बांध दी गई है।
रविवार शाम सरायन नदी किनारे चर रही कमलेश की भैंस पर बाघ ने हमला कर दिया था। भैंस की आवाज सुनकर चरवाहों ने बाघ को लाठी-डंडों से पीटकर भगा दिया था। सूचना पर सोमवार को वन विभाग के आला अधिकारियों ने गांव पहुंच घायल भैंस के शरीर पर निशानों को देखकर बाघ होने की पुष्टि की थी। साथ ही बाघ पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने का आदेश दिया था।
वन रेंजर बीनू पाल ने पिंजरा लगाने के लिए विशेषज्ञ बुलाने की बात कही। पिंजरा गांव में मंगलवार रात पहुंचा भी दिया गया था, मगर बुधवार शाम तक इसे लगाया नहीं गया। बृहस्पतिवार सुबह ही वनकर्मियों की गांव में चहलकदमी शुरू हो गई। देर शाम तक पिंजरा लगा दिया गया।
पिंजरे को गांव के पश्चिम स्थित सरायन नदी के किनारे व रोजहा, बिशुनपुर व ढोलई के रास्ते पर गन्ने के खेत के पास लगाया गया है। बकरी के बच्चे को इसके अंदर बांधा गया है। पिंजड़े को एक बार चलाकर देखा गया। इसे लगाने के लिये वन विभाग के वन दरोगा मुकेश, वन दरोगा गुरु नारायण, वन दरोगा नन्द लाल, वन दरोगा रामासरे, सोमनी राठौर मौके पर मौजूद रहे।