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कृषि कानूनों की वापसी से कोई खुश तो कोई मायूस

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सीतापुर। सिक्ख समुदाय के लोग शुक्रवार को गुरु नानक देव की जयंती मनाने में मशगूल थे। हिंदूू समुदाय के लोग कार्तिक पूर्णिमा पर तीर्थों व नदियों में स्नान कर पूजा-दान में तल्लीन थे। इसी बीच प्रधानमंत्री ने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा कर दी। इसकी सूचना जैसे ही किसानों को मिली, वे खुशी मनाने लगे। किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री के निर्णय की सराहना करते हुए इसका स्वागत किया है।
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लहरपुर संवाद के अनुसार नगर के मोहल्ला गन्नी टोला निवासी किसान मंच के मंडल प्रवक्ता दिनेश शुक्ला ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाना किसानों की जीत है। इस आंदोलन में शहीद हुए 800 किसानों और धरने पर बैठे किसानों की जीत है। किसान नेता दिनेश पटेल ने प्रधानमंत्री के तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए उनके प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
किसान मजदूर संगठन के मंडल अध्यक्ष अजीत वर्मा ने कहा कि शनिवार को संगठन की बैठक के बाद निर्णय लिया जाएगा, वैसे कृषि कानूनों का वापस लिया जाना किसानों की जीत है। किसान अनूप यादव ने कहा कि कृषि कानून वापस लेने से किसानों का नुकसान हुआ है। इसके वापस होने से बिचौलियों की पौ बारह हो जाएगी। दलाली फिर से बढ़ जाएगी।
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सांडा संवाद के अनुसार कृषि कानूनों की वापसी को लेकर किसान मोलहेराम ने बताया कि वर्तमान में न तो कोई हानि है और न ही कोई लाभ। ज्ञानेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि तीनों कृषि कानून किसानों के हित में थे। यदि वापस लिए गए हैं तो प्रधानमंत्री की इसमें कोई अच्छी सोच ही होगी।
मिश्रिख संवाद के अनुसार सूरजपुर निवासी श्यामू सिंह ने बताया कि पीएम ने जो किया, ठीक ही किया है। शैलेंद्र कुमार निवासी रघुनाथपुर ने बताया कि कृषि कानूनों को किसान समझ ही नहीं पा रहे थे। इन्हें वापस लिया जाना ठीक है।
रामपुर मथुरा संवाद के अनुसार, किसान जसविंदर सिंह और परमजीत सिंह का कहना है कि चुनाव के मद्देनजर अपनी हार देखते हुये किसान विरोधी कृषि कानून रदद् करने का फैसला लिया गया है। किसान यूनियन के तहसील अध्यक्ष रामसेवक वर्मा ने बताया कि इन कानूनों के वापस लेने की सरकार ने केवल घोषणा की है।
महोली संवाद के अनुसार क्षेत्र के रघुनाथ व गजराज प्रसाद वर्मा का मानना है कृषि कानून तो सही थे लेकिन इसका अनुपालन नहीं हो पा रहा था। क्षेत्र के बड़ागांव निवासी प्रगतिशील किसान अरविंद सिंह तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने से खुश नजर आए। उनका कहना है कि सरकार ने कहीं भी अपनी फसल बेचने के लिए छूट दे रखी थी।
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