जेल अधीक्षक एसके सिंह ने बताया कि एक सप्ताह से जेल में राखियां बनाने का काम किया जा रहा था। जो राखियां बनाई गई हैं। उनका एक स्टॉल कारागार परिसर के अंदर ही लगा दिया गया है।
रक्षाबंधन पर्व पर जेल में बंद महिला बंदियां भी राखी बनाने का काम कर रहीं थी। उनके हाथ से बनी राखियों पुरूष बंदियों को बांधी गई। साथ ही उनको स्टॉल लगाकर बेचा भी गया। राखियां बनाने के लिए बंदियों को जेल प्रशासन ने सहयोग करते हुए कच्चा माल उपलब्ध कराया था।
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जिला कारागार में कुल 39 महिला बंदी निरुद्ध हैं। जो कि कच्चे सजावटी सामान से राखी बनाने का काम कर रहीं थी। खास बात यह है कि जहां तारा, आरती, रेनू और राधा राखियां बना रहीं थी। वहीं राबिया और रूबी भी बढ़चढ़ कर राखियों को धागे में पिरोकर संवार रही थी। उनका कहना है कि अगर उनकी बनी राखियाें को हिंदू धर्म के लोग पहनेंगे। तो उनको और भी ज्यादा खुशी होगी। जेल के अंदर से ही सही वह चाहती हैं कि देश में सर्व धर्म का सद्भाव बना रहे। ताकि किसी को भी कोई तकलीफ न हो। राखियां बनाने में जेल प्रशासन की ओर से भी मदद प्रदान की जा रही है। महिला बंदी रक्षक रजनी और अंशू की देखरेख में ही यह सारा काम हो रहा है।
स्टॉल लगाकर हो रही बिक्री
जेल अधीक्षक एसके सिंह ने बताया कि एक सप्ताह से जेल में राखियां बनाने का काम किया जा रहा था। जो राखियां बनाई गई हैं। उनका एक स्टॉल कारागार परिसर के अंदर ही लगा दिया गया है। जो मुलाकाती लोग आते हैं। वह यहां से राखियों की खरीददारी कर सकते हैं। इससे होने वाले लाभ को महिला बंदियों में ही बांट दिया जाएगा।