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आज से गूंजेगी शहनाई, बुक हुए गेस्ट हाउस, बग्घी और हलवाई

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सीतापुर में रम्पा रोड स्थित दुकान पर सहालग को लेकर बैंडबाजे की करते मरम्मत। - संवाद - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। कोरोना काल के लंबे अंतराल के बाद इस बार शहनाईयों की गूंज धूम धड़ाके से सुनाई देगी। सोमवार से सहालग शुरू हो रही है और 13 दिसंबर तक सहालगें जोर शोर से चलती रहेंगी। इस सहालग में इस बार हर तरफ रौनक दिखाई दे रही है। गेस्ट हाउस, बैंड बाजा, वाहन, बग्घी सहित तमाम बाजारों में एडवांस बुकिंग हो चुकी हैं।
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इससे कारोबारियों में पिछले दो साल का घाटा पूरा होने की उम्मीद जगी हैं। वह लगातार बुकिंग करने में व्यस्त चल रहे हैं। पंडित आशीष शास्त्री ने बताया कि सोमवार से शुभ लग्नें शुरू हो रही हैं। सुबह 8:30 बजे से इसकी शुरूआत हो जाएगी। इस दौरान मुंडन, विवाह, गोद भराई सहित तमाम मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे।
ठंडक ने दस्तक दे दी है, इस मौसम में शादियों का मजा कुछ अलग ही होता हैं। सोमवार से सड़कों पर बैंड बाजा के साथ लोग नाचते थिरकते हुए नजर आएंगे। इसकी तैयारियों को लेकर बाजार में रौनक छाई हुई है। शादी में उपयोग होने वाली सामग्री को लोग खूब खरीद रहे हैं। वहीं गेस्ट हाउस, बैंड बाजा, वाहन, बग्घी सहित अन्य बाजारों में पहले से ही एडवांस बुकिंग हो चुकी है। किसी के पास छह तो किसी के पास 10 बुकिंग एडवांस में चल रही हैं।
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इन कारोबारों से जुड़े लोगों का मानना हैं दो बरस से लोग शादी समारोह बहुत ही सादगी से कर लेते थे। उनका मानना है कि इस बार जब कोरोना नहीं है तो दो सालों का घाटा पूरा हो जाएगा। कुछ अधिक कमाई भी हो जाएगी। इससे व्यापारियों में सहालग शुरू होने से खुशी की किरण दौड़ गई है। सर्राफा, कपड़ा व बर्तन बाजार में भी भीड़ जुट रही है।
खूब हैं लग्नें
पंडित उमाकांत शुक्ल का कहना है काशी महावीर पंचाग के अनुसार इस बार शहनाईयों की गूंज काफी समय तक गूंजेगी। 19, 20, 22, 26, 28, 29 व 30 नवंबर को शुभ लग्नें रहेंगी। इसके बाद दिसंबर में 1, 2, 5, 7, 11, 12 व 13 को लग्नें हैं। 13 दिसंबर के बाद मांसत दोष लग जाएगा, सहालगें रुकेंगी। उसके बाद 15 जनवरी 2022 से दोबारा लग्नों की शुरूआत होगी, फिर 19 फरवरी तक ये चलेंगी। 22 फरवरी को गुरू अस्त हो रहा है।
मंदा था धंधा
दो साल से धंधा बहुत ही धीमा पड़ गया था। इस साल अब तक छह बुकिंग हो चुकी हैं। इनका पैसा भी एडवांस में मिल गया है। इससे बढ़िया बुकिंग होने की उम्मीद है।
साबिन खान, बैंड बाजा मास्टर।
परवरिश करना था मुश्किल
कोरोना काल में घोड़ों की परवरिश करना मुश्किल हो रहा था। एक दिन में घोड़े की देखरेख में करीब चार सौ रूपये से अधिक का खर्च आता है। अब बुकिंग तेजी से मिल रही है। इससे राहत है।
रमेश चंद कनौजिया, बग्घी मास्टर।
पूरी होने की है उम्मीद
जब कोरोना में बुकिंग नहीं हो रही थी। उस समय खर्चा निकालना मुश्किल था। गेस्ट हाउस को मेंटीनेंस कराने में काफी खर्चा आया है। इस बार इस घाटे के पूरे होने की उम्मीद है।
वैभव बंसल, उत्सव गेस्ट हाउस मालिक।
अच्छा होगा कारोबार
कोरोना में गाड़ियों की बुकिंग एकदम बंद हो गई थी। वाहन बाहर नहीं जा रहे थे। इस बार सहालग के चलते काफी अधिक लोगों ने बुकिंग करवाई है। इससे अच्छा कारोबार होगा।
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विजय मिश्रा, ट्रेवेल्स एजेंसी संचालक।
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