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सरायन और कठिना को मनरेगा से बनाएंगे निर्मल

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सीतापुर में कठिना नदी के पनहिया घाट पर खर-पतवार और जलकुंभी सफाई करते लोग। (फाइल फोटो) - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। जिले में गोमती की सहायक नदियां सरायन व कठिना का जल प्रवाह कम हो रहा है या कहें ये नाला बनकर रह गई हैं। इसे सदानीरा करने के लिए मनरेगा से कार्ययोजना बनाई गई है। चयनित ग्राम पंचायतों में योजना के तहत कार्य किए जा रहे हैं। सरायन नदी से जुड़ी 38 ग्राम पंचायतों में तालाबों का जीर्णोद्धार करने के साथ ही खेत बंधा, ड्रेन सफाई आदि कार्य किए गए हैं। साथ ही लोक भारती संस्था की ओर से निरंतर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इससे प्रेरित होकर ग्रामीण जल संचयन के कार्य कर रहे हैं।
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सरायन नदी के जीर्णोद्धार के लिए मनरेगा से बनाई गई कार्ययोजना में 79 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है। इनमें 104 तालाबों का जीर्णोद्धार वर्तमान वित्तीय साल में होना है। 116 ड्रेनों की सफाई, 325 बंधों का निर्माण, 59 व्यक्तिगत मेड़बंदी, सामुदायिक पौधरोपण के 130 कार्य कराए जाने हैं। साथ ही व्यक्तिगत पौधरोपण व समतलीकरण के कार्य होने हैं। इसके सापेक्ष 38 ग्राम पंचायतों में कार्य कराए गए हैं।
हरगांव ब्लॉक की ग्राम पंचायत हैदरपुर में झबरी तालाब को और ढालई कला में बरसतिया तालाब, अख्तियारपुर मे पेनडारिया तालाब का जीर्णोद्धार किया गया है। बेलामऊ कला में चार किसानों के खेत का समतलीकरण कराया गया। ब्लॉक गोंदलामऊ की ग्राम पंचायत हिंडौरा मे खरतहिया तालाब से सरायन नदी तक ड्रेन, गढ़ीखेरवा में मोहनलाल के खेत से मोलहे के खेत तक बंधा निर्माण किया गया है। इसी प्रकार अन्य ग्राम पंचायतों में कार्य किए गए हैं।
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कठिना के कैचमेंट एरिया में बने वाटरशेड
कठिना नदी के जीर्णोद्धार के लिए नदी के कैचमेंट एरिया में छह वाटरशेड बनवाए गए हैं। इससे 19 हजार से अधिक मानव दिवस का सृजन होने से 1800 श्रमिकों को रोजगार मिला। 366 महिला श्रमिक भी लाभान्वित की गईं। कठिना के जीर्णोद्धार के लिए सात तालाबों की खुदाई, चार बंधा निर्माण, ड्रेन खुदाई के साथ ही पौधरोपण के कार्य किए गए हैं।
कम पानी खर्च होने वाली फसलें उगाने पर की चर्चा
लोक भारती व पथिक एफपीओ की अगुवाई में कृषि विभाग के सहयोग से सहादत नगर गांव में भविष्य में आने वाले जल संकट और प्राकृतिक खेती को लेकर बैठक हुई। इसमें कम पानी खर्च होने वाली फसलें उगाए जाने पर आसपास के गांवों के निवासियों व जन प्रतिनिधियों के साथ विस्तार से चर्चा की। साथ ही वर्षा जल संचयन व गोमती नदी संरक्षण पर भी मंथन किया। 29 किमी. सूखे पड़े चितवा नाला तक तालाबों के पानी के बहाव के पुख्ता इंतजाम किए जाने पर योजना बनाई गई। इसके लिए सरकार और संगठन के माध्यम से सहादत नगर के किनारे गांवों मे बांध, बंधिया के साथ ही चितवा तक रजबहा कराने पर जोर दिया गया। कठिना बचाओ अभियान के सह संयोजक शिव सागर सिंह ने लेमन ग्रास, मूंगफली आदि की खेती करने पर जोर दिया। नीरज सिंह ने नदी संरक्षण पर व्यापक दृष्टिकोण रखा। लोक भारती के जिला संयोजक कमलेश सिंह ने बताया कि यह नाला वजीरनगर से निकलकर ग्राम बरेठी के समीप गोमती में मिला है। नाला सूख गया है। इससे जुड़ने वाले 17 तालाब भी सूखे हैं। इनके पुनर्जीवन, संरक्षण के लिए कार्य योजना कृषि विभाग के सहयोग से बनाई जाएगी। बैठक में बीएमटी निर्मल पांडे, प्रधान सहादतनगर लोकनाथ मौर्य, बरेठी प्रधान देशराज यादव, शैलेंद्र, महेंद्र, इंद्रेश आदि मौजूद रहे।
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