सीतापुर। 88 हजार ऋषियों, मुनियों की तपोस्थली में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। चुनावी चौसर इस बात के संकेत दे रही है कि जातीय गोलबंदी से जीत के समीकरण बनाने की सियासत हो रही है।
विधानसभा चुनाव का रण जीतने के लिए समर सज चुका है। जिले में 23 फरवरी को लोकतंत्र का महापर्व है। सियासी पहलवान चुनावी दंगल में किस्मत आजमाने के लिए कूद पड़े हैं। हर प्रत्याशी का जीत का गुमान आसमान पर है, लेकिन चुनावी रण में उतरे पहलवानों पर जीत का सेहरा जातीय समीकरण ही तय करेंगे। ऐसे में जातिगत समीकरणों को साधकर चुनावी वैतरणी पार करने की प्रत्याशियों के सामने कड़ी परीक्षा है।
सभी पार्टियों ने पत्ते खोलकर सियासी तस्वीर साफ कर दी है। चुनावी मैदान में योद्धा पूरी तैयारी के साथ उतर चुके हैं। मकसद साफ है कि हर सूरत में सीट पर कब्जा जमाना। इसके लिए वादों और दावों का पिटारा नेता खोल रहे हैं। चुनावी दंगल जीतने के लिए पार्टी और प्रत्याशियों के वादों में विकास अहम मुद्दा है। जनता की दुखती रग पर हाथ रखकर वह जीतने के लिए जतन कर रहे हैं, लेकिन सियासत के चश्मे से देखें तो राजनीति जातिगत समीकरणों के ही ईद-गिर्द घूम रही है।
प्रत्याशियों को उतारने वाली पार्टियां भी इस बात को बहुत ही बखूबी से समझ रही हैं। यही वजह है कि, उन्होंने जातिगण फैक्टर को ध्यान में रखकर अपने सियासी सूरमाओं को मैदान फतह करने के लिए उतारा है। सियासी पंडितों की माने तो भाजपा को छोड़कर सभी प्रमुख पार्टियों की नजर मुस्लिम मतदाताओं पर है, फिर चाहे सपा हो या बसपा।
मुस्लिम वोटरों के साथ पिछली जातियों को भी साधा जा रहा है। भाजपा सबका साथ, सबका विकास के मुद्दे को आगे कर सामान्य वर्ग को अपने पाले में करने के लिए कवायदें कर रही हैं। अब प्रत्याशी जातिगत समीकरणों को साधने में कहां तक कामयाब हो पाते हैं, मतदाताओं पर उनकी पैठ कितनी मजबूत होती है, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन एक बात तय है कि जातीय समीकरण ही जीत का परचम लहराएंगे। अब इस इम्तिहान के नतीजों से तय होगा कि जनता जनार्दन किसका राजतिलक करती हैं।
रोमांचक है सियासी बिसात
पार्टियों ने जातिगत वोटरों के आधार पर प्रत्याशियों को उतारा है। सदर सीट की बात करें तो बसपा और कांग्रेस को छोड़कर भाजपा, सपा, आप ने पिछड़ी जातियों पर दांव लगाया है। वजह, इस सीट पर ब्राह्मण मतदाताओं के साथ-साथ पिछड़ी जाति के मतदाताओं की संख्या भी ठीक ठाक है। इसी तरह से मिश्रिख, महोली, हरगांव, लहरपुर, बिसवां, महमूदबाद, सेवता, सिधौली में सभी दलों ने जातीय समीकरणों के आधार पर प्रत्याशियों पर दांव लगाया है, इसमें भाजपा और सपा ने जातीय गोलबंदी को फिट बिठाकर चुनावी बिसात काफी रोमांचक बिछाई है।
हर सीट पर भाजपा-सपा की टक्कर
जिले की सभी नौ विधानसभाओं की सीटों पर वैसे तो सभी दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों को उतारा है, लेकिन देखा जाए तो हर सीट पर भाजपा और सपा के बीच ही मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। हर सीट पर दोनों दलों के ही प्रत्याशी एक-दूसरे को टक्कर दे रहे हैं। अब इस लड़ाई में चुनावी जंग जीतता कौन है, यही तो जातीय समीकरण तय करेंगे। जनता का रुझान किसकी ओर जाता है, देखना यह दिलचस्प होगा।