सीतापुर। यूपी बोर्ड परीक्षा में बदली प्रैक्टिकल की व्यवस्था विद्यार्थियों के लिए मुसीबत बन गई है। कारण यह है जिले में शासन द्वारा निर्धारित किए गए प्रैक्टिकल केंद्रों पर प्रयोगशाला ही नहीं है। शासन ने बिना विद्यालय की मान्यता देखे ही केंद्र तय कर दिए गए है। अब जब प्रैक्टिकल कराने के लिए परीक्षक पहुंच रहे हैं तो कॉलेज प्रशासन हैरान हो रहा है। इस पर करीब 20 कॉलेजों ने डीआईओएस को आपत्ति दी है। जिसके जरिए प्रयोगशाला वाले कॉलेजों को केंद्र बनाने की गुहार लगाई है।
जिले में प्रथम चरण में 27 अप्रैल तक प्रैक्टिकल होने है। इस बार शासन ने प्रैक्टिकल की व्यवस्था में परिवर्तन कर दिया है। विद्यार्थियों ने जिन केंद्रों पर अपनी परीक्षा दी है, उस केंद्र पर ही प्रैक्टिकल कराए जाएंगे। साथ ही सीसीटीवी की निगरानी में प्रैक्टिकल होंगे। इसके लिए प्रशासन की तरफ से प्रत्येक केंद्र पर एक पर्यवेक्षक नियुक्ति किया गया है। अब जब नियुक्त हुए परीक्षक परीक्षा केंद्रों पर पहुंच रहे है तो उन्हें उस विद्यालय में प्रयोगशाला न होने की जानकारी मिल रही है। इससे विद्यार्थियों को कॉलेज प्रशासन सूचना भी नहीं दे पा रहे है।
इससे परेशान 20 से अधिक कॉलेजों ने डीआईओएस से आपत्ति दर्ज कराई है। ऐसे विद्यालयों में प्रैक्टिकल कराने की बात कही है, जिन विद्यालयों में संबंधित विषय की प्रयोगशाला मौजूद हो। इससे प्रैक्टिकल होने में इस बार काफी देरी हो सकती है। डीआईओएस देवी सहाय तिवारी ने बताया कि कई कॉलेजों में गलत ढंग से विद्यार्थियों का आवंटन हो गया है। उन कॉलेजों में संबंधित विषय की प्रयोगशाला नहीं है। इन कॉलेजों की सूची बनाकर शासन को भेजी जा रही है। वहां से अनुमति मिलने पर विद्यार्थियों के प्रैक्टिकल कराए जाएंगे।
ल्दबाजी में हुआ निर्णय
माध्यमिक शिक्षा विभाग का कहना है बोर्ड ने प्रैक्टिकल की व्यवस्था तो परिवर्तित कर दी है, लेकिन अपनी तैयारी नहीं की। आनन फानन में आदेश पारित करके विद्यालय आवंटित कर दिए गए हैं। जिन विषयों की मान्यता कॉलेज की नहीं है, इसकी जानकारी शासन को है। फिर भी गलत ढंग से कॉलेज आंवटित करके बेचैनी बढ़ा दी है। इससे माध्यमिक शिक्षा विभाग के कर्मचारी गलतियां दुरुस्त करने में रात दिन जूझ रहे है।