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एक हजार आत्माओं को मिलेगी मुक्ति

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सीतापुर। गुजर चुके पुरखों के अपनों को अभी तक भले ही फूल सिराने की सुध न आई हो, लेकिन गुरुवार को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद शहर की संजीवन संस्था इस नेक काम के लिए आगे आई है। संस्था ने गोपाल घाट के श्मशान घाट के लॉकर में रखे करीब एक हजार अस्थि कलशों में रखे फूलों को गंगा में विसर्जित करने का बीड़ा उठाया है। अब जल्द ही इन्हें मुक्ति मिल सकेगी।
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कई परिजन गोपाल घाट पर अंतिम संस्कार कर अस्थियों को लॉकर में रखकर चले गए। दोबारा इस ओर रुख नहीं किया। अभी पितृपक्ष चल रहे हैं। धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं हैं कि पितृपक्ष में अस्थियों को विसर्जित करने से आत्माओं को मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन इन तमाम मान्यताओं के बाद भी अपनों के पास फूल सिराने की फुरसत नहीं है।
इसको लेकर गुरुवार के अंक में अमर उजाला ने ‘एक हजार आत्माओं को मुक्ति का इंतजार’ शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर छपने के बाद सराहना की गई। शहर की संजीवन संस्था आगे आई है।
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संस्था के अध्यक्ष आकाश अग्रवाल ने अमर उजाला से मुक्ति का इंतजार कर रहीं इन अस्थियों को गंगा में विसर्जित करने की बात कही है। आकाश अग्रवाल ने कहा कि यह पुण्य का काम है। अस्थियों को गंगा जी में विसर्जित करने के लिए ले जाएंगे। पितृपक्ष में ही फूलों को गंगा में सिरा दिया जाएगा।
विद्वान पंडित से कराएंगे विसर्जित
आकाश अग्रवाल ने बताया कि अस्थियों को विसर्जित करने के लिए विद्वान पंडित को लेकर जाएंगे। वहां पर पूरी रीति रिवाज और परंपरा के अनुसार फूलों को रिसाएंगे। पंडित से संपर्क साधा गया है। आकाश का कहना है कि तीन माह पुरानी अस्थियों को छोड़कर बाकी सभी को गंगा जी ले जाएंगे। बताया कि तीन महीने की इसलिए रोक देंगे, ताकि उनके घर वाले भी आ सकते हैं विसर्जित करने के लिए।
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