सीतापुर। रूस-यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग में कर्नाटक के छात्र नवीन की गोलीबारी में हुई मौत के बाद जिले के फंसे छात्रों के मां-बाप दहशत में हैं। चिंता इस कदर है कि दिन का सुकून और रात की नींद तक गायब है। लाडलों की चिंता मां-बाप को सता रही है। सुबह से रात तक होने वाली हर आहट पर परिवार का कलेजा कांप उठता है। मोबाइल की रिंग टोन बजते ही होनी और अनहोनी को लेकर दिल की धड़कनें बढ़ जा रही हैं।
सुकून की खबर सुनकर कलेजे को ठंडक पहुंच रही है, लेकिन असली खुशी और कलेजे को ठंडक तभी मिलेगी, जब उनकी आंखों के सामने उनके आंखों के तारे होंगे। बच्चों की सकुशल वापसी के लिए मां-बाप भगवान से दुआएं कर रहे हैं। मिन्नतें मांग रहे हैं। दुआओं और प्रार्थनाओं में बस लाडलों की घर वापसी की बातें हैं।
बुधवार को अमर उजाला ने छात्रों के परिजनों से बात की तो उनका दर्द गुबार बनकर फूट पड़ा। यूक्रेन से अभी तक रामपुर मथुरा इलाके का छात्र डेविड ही सकुशल वापस लौट सका है, जबकि अन्य के आने का इंतजार परिवार को बेसब्री से है। परिजनों का कहना है कि हर वक्त दिल और दिमाग बच्चों में लगा है।
या अल्लाह... मेरे शादाब को सकुशल भेज दे
बिसवां इलाके के चंदनपुर का छात्र शादाब यूक्रेन से तो सुरक्षित बाहर आ गया है, लेकिन अभी तक घर नहीं आ सका है। इससे मां-बाप की चिंता कम होने का नाम नहीं ले रही है। बेटे की सकुशल वापसी के लिए उसकी मां मस्जिद में पहुंचकर अल्लाह से अरदास लगा रहीं हैं कि उनके बेटे को सकुशल उन तक भेज दें। बुधवार को शादाब की मां गांव में बनी मस्जिद में बेटे की सलामती की दुआएं कर रहीं थीं, इसी बीच अमर उजाला की टीम उनके पास पहुंची। बातचीत आगे बढ़ी तो वह भावुक हो गईं।
बोलीं कि बस हर वक्त बेटे की चिंता है। गोलीबारी, बमबारी से कलेजा छलनी हो रहा था। रहा नहीं गया तो मस्जिद आकर अल्लाह से दुआएं कर रहीं हूं। शादाब के चाचा हसीब अखतर ने बताया कि उनका भतीजा अपने ग्रुप के 60-70 लोगों के साथ मंगलवार की रात हंगरी बॉर्डर पहुंच गया था। वहां पर इंडियन एंबेसी की ओर से शादाब समेत अन्य छात्रों को उनकी सहूलियत का सामान देकर ट्रेन के माध्यम से बॉर्डर से करीब 300 किमी. दूर हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट भेजा गया है। बुडापेस्ट पहुंचकर यह लोग भारत के लिए रवाना होंगे। हालांकि, अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि ये लोग भारत कब तक वापसी करेंगे। परिजन लगातार शादाब से संपर्क में हैं।
सिधौली के तीनों छात्रों ने पार किया बार्डर, फ्लाइट का इंतजार
यूक्रेन में फंसे सिधौली क्षेत्र के तीनों छात्रों ने फिलहाल खतरे के बार्डर यानी यूक्रेन को पार कर लिया है। इलाके के गड़िया हसनपुर के निवासी फैज खान, कस्बे के बाजार मोहल्ले के निवासी आदित्य प्रताप सिंह, प्रेमनगर मोहल्ले के निवासी मृत्युंजय चौरसिया ने यूक्रेन बार्डर पार कर लिया है। पड़ोसी देशों में ठहरे हैं, जहां उन्हें फ्लाइट का इंतजार है। तीनों एमबीबीएस छात्र अलग-अलग देशों में ठहरे हैं। फिलहाल तीनों सुरक्षित हैं। आदित्य प्रताप सिंह ने अपने पिता मलय सिंह को बताया कि उसने बॉर्डर पार कर लिया है।
स्लोवाकिया देश की कोसिस शहर के गेस्ट हाउस में ठहरे हैं। बताया कि भारतीय दूतावास कार्यालय की ओर से बेहतर इंतजाम किए गए हैं। बस फ्लाइट की संख्या कम होने की वजह से इंतजार करना पड़ रहा है। दूतावास कार्यालय की ओर से तीन दिन इंतजार करने के लिए कहा गया है। उसके साथ 125 अन्य भारतीय छात्र ठहरे हुए हैं, जबकि दूसरे होटलों में भी करीब 400 छात्र फ्लाइट मिलने के इंतजार में हैं। कुछ लोग अभी भी सुमी शहर में फंसे हैं।
प्रेमनगर मोहल्ले के मृत्युंजय चौरसिया ने अपनी मां आशा चौरसिया को बताया कि उसने बॉर्डर पार कर लिया है। इस समय रोमानिया के बुखारेस्ट शहर के शेल्टर होम में हैं। यहां एंबेसी ने बेहतर व्यवस्थाएं की है। खाने-पीने की अच्छी सुविधा है। शेल्टर होम को एनजीओ भी सहयोग कर रहे हैं। उसके साथ अन्य 88 भारतीय छात्र हैं। शाम तक फ्लाइट मिलने की उम्मीद है। गड़िया हसनपुर के छात्र फैज खान ने पिता शमी अहमद खान को बताया कि वह बॉर्डर पार कर हंगरी देश पहुंच चुका है, जहां होटल में रुक कर फ्लाइट का इंतजार कर रहा है। उसने परिवार को परेशान न होने की बात कही।
यूनिवर्सिटी के बंकर में फंसी तंबौर की तान्या
तंबौर क्षेत्र के रिहार की रहने वाली तान्या पांडेय अब भी यूक्रेन स्थित खारकीव मेडिकल यूनिवर्सिटी के बंकर में फंसी हुई है। यही वजह है कि परिवार के लोग बेहद चिंतित और परेशान हैं। वहां के हालातों को देखते हुए धड़कनें बढ़ी हुई हैं। तान्या के पिता पंकज पांडेय ने बताया कि वह काफी परेशान हैं। लगातार भारतीय दूतावास से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन उसके वहां से घर वापसी का कोई समाधान नहीं हो सका है।
पिता ने बताया कि बुधवार सुबह बेटी से फोन पर बात जरूर हुई है, जिसमें उसने बताया कि तबियत तो ठीक है, लेकिन युद्ध की दहशत से डर बहुत लग रहा है। बंकर से बाहर निकल नहीं सकती। फास्ट फूड खाकर ही गुजर हो रही है। पिता ने बताया कि भारतीय दूतावास के हिसाब से उसे व उसके सभी साथियों को गुरुवार को खारकीव से निकालकर रशिया बार्डर ले जाकर देश लाने की जानकारी मिली है। बेटी जब तक घर नहीं पहुंचती हम लोग बहुत चिंतित हैं।