सीतापुर। जिला अस्पताल में मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़वाने की सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में मरीजों को रेफर करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। जिला अस्पताल के ब्लॅड बैंक में प्लेटलेट्स निकालने की कोई सुविधा नहीं है।
जिला अस्पताल के ब्लॅड बैंक में रक्तदान की सुविधा है। इससे लोगों को जरूरत के समय खून मिल जाता है। प्लेटलेट्स की कोई व्यवस्था नहीं है। इस समय संक्रामक रोगों का प्रकोप फैला हुआ है। इससे लोग डेंगू से संक्रमित हो रहे हैं। जिले में भले ही सरकारी आंकड़ों में डेंगू से एक भी मौत न हुई हो, लेकिन जिले में कई लोगों की मौत हो चुकी है।
ऐसे में डेंगू मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें प्लेटलेट्स चढ़वाने की जरूरत होती है। यह सुविधा जिला अस्पताल से नदारद है। ऐसे में मरीजों को लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। कई बार लखनऊ पहुंचने से पहले ही उनकी जिंदगी पर संकट खड़ा हो जाता है। जानकारों की माने तो रोजाना 8 से 10 मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ती है। अगर यह सुविधा जिले में शुरू हो जाए तो काफी हद तक लोगों को बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
डेंगू मरीजों के सामने होती है दिक्कत
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. जेएन सिंह का कहना है कि प्लेटलेट्स की दिक्कत डेंगू मरीजों के सामने आती हैं। लगातार बुखार आने से उनकी प्लेटलेट्स कम पड़ने लगती है। इनकी संख्या 30 हजार से नीचे आ जाती है तो मरीजों की हालत गंभीर होने लगती है। तब उन्हें प्लेटलेट्स चढ़वाने की जरूरत होती है।
एबी ग्रुप का नहीं है खून
जिला अस्पताल की ब्लॅड बैंक में इस समय एबी ग्रुप का ब्लॅड नहीं है। मौजूदा समय में 56 यूनिट खून बैंक के स्टॉक में रखा हुआ है। जबकि रोजाना आठ से 10 मरीजों को ब्लॅड बैंक की तरफ से खून दिया जाता है। करीब दो माह पहले जब संक्रामक रोग तेजी से फैल रहे थे तो उस समय बैंक से करीब 30 से 40 यूनिट की रोजाना खपत होती थी।
जिला अस्पताल की ब्लॅड बैंक में अभी प्लेटलेट्स निकालने की सुविधा नहीं है। उम्मीद है कि जल्द ही यह सुविधा शुरू हो जाएगी। आने वाले मरीजों को जरूरत के अनुसार पर्याप्त खून दिया जाता है।
- डॉ. अनिल अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल