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सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का अकाल

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महमूदाबाद सीएचसी पर पर्चा बनवाते मरीज।- संवाद - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवाओं को भी इलाज की दरकार है। सीएचसी का हाल बेहाल है। इस समय वायरल फीवर के कारण मरीजों की संख्या में दोगुनी वृद्धि हो गई है तो मरीजों को इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। कहीं पर चिकित्सकों के पद रिक्त हैं तो कहीं देर से डॉक्टर पहुंचते है। एक्स-रे की जांचों के लिए लोग प्राइवेट में दौड़ लगा रहे है। इससे मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।
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ग्रामीण इलाकों में चल रही स्वास्थ्य सुविधाओं को परखने के लिए सोमवार को अमर उजाला टीम ने सीएचसी में मिलने वाली सुविधाओं की पड़ताल की। सुबह करीब साढ़े आठ बजे सीएचसी लहरपुर में मरीज आ रहे थे। सीएचसी तक पहुंचने का मार्ग बहुत ही खराब मिला। मरीज गंदे पानी के बीच से होकर किसी तरह निकलने को मजबूर थे।
मरीज रूबीना ने बताया कि यह हालात काफी समय से बने हुए है। जब मरीज अस्पताल पहुंचे तो उन्हें लंबी-लंबी लाइनों में लगकर इलाज कराना पड़ा। करीब 10 बजे सीएचसी मछरेहटा, महमूदाबाद, रेउसा में एक्स-रे की जांच ठप मिली। यहां पर आए मरीजों को बाहर से एक्स-रे करवाने का फरमान सुनाया जा रहा था।
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बिसवां में तो अधीक्षक समेत कई चिकित्सक सुबह 10 बजे तक नहीं पहुंचे। कई जगहों पर बरसात के इस मौसम में एंटी रैबीज नहीं मिला। इन हालातों में मरीज इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे।
सीएचसी महमूदाबाद
एक्स-रे मशीन खराब, लौटे मरीज
सीएचसी महमूदाबाद में सोमवार को ओपीडी में 362 मरीज आए। इसमें 93 मरीज बुखार से पीड़ित मिले। सीएचसी में पांच चिकित्सक व अधीक्षक समेत छह डॉक्टरों की नियुक्ति हैं। सभी उपस्थिति रहे। एक्स-रे कराने आए मरीज वापस कर दिए गए। यहां पर मशीन काफी समय से खराब पड़ी है। कोविड प्रोटोकॉल की भी धज्जियां उड़ाई जा रही है। मरीज बिना सोशल डिस्टेंसिंग के खड़े रहे।
सीएचसी लहरपुर
अस्पताल में नहीं एंटी रैबीज का इंजेक्शन
सीएचसी लहरपुर में सुबह मरीजों की काफी भीड़ दिखाई दी। अधिकतर मरीज बुखार से पीड़ित मिले। सोमवार को करीब 200 मरीज ओपीडी पहुंचे, जिसमें करीब सौ मरीज बुखार से पीड़ित थे। तैनात छह चिकित्सक अस्पताल में मिले। एक्स-रे मशीन खराब मिली। एंटी रैबीज के इंजेक्शन न होने के कारण मरीज लौटाए जा रहे थे। शौचालय काफी गंदे मिले। परिसर में गंदगी फैली हुई थी।
सीएचसी बिसवां
कभी कभार आते हैं चिकित्सक
सीएचसी बिसवां में सात चिकित्सक तैनात हैं। सुबह 8 से 10 बजे के बीच डॉ. सुमित मेहरोत्रा, डॉ. श्याम सुंदर, डॉ. कामरान, चीफ फार्मासिस्ट डॉ. केपी मिश्रा फार्मासिस्ट इंद्रजीत राय, स्तुति वर्मा व वार्ड ब्वॉय मौजूद मिले। दवा काउंटर पर भीड़ लगी हुई थी। एक्स-रे कक्ष में ताला लटका हुआ था। लेकिन सीएचसी अधीक्षक डॉ. विकास मिश्रा, डॉ. पूजा चोपड़ा, डेंटल सर्जन डॉ. वीके मौर्या 10 बजे तक नहीं पहुंचे थे। जानकारी पर पता चला कि डेंटल सर्जन कभी कभार ही अस्पताल आते है। अधीक्षक वैक्सीनेशन के निरीक्षण को लेकर ग्राम नरेंद्रपुर गए हैं।
खैराबाद सीएचसी
हर काउंटर पर लगी लाइन
खैराबाद सीएचसी में सुबह के समय मरीजों की काफी भीड़ थी। अधिकतर मरीज बुखार से पीड़ित मिले। सुबह नौ बजे तक ओपीडी के दो काउंटर पर करीब 150 मरीज देखे जा चुके थे। डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि 80 मरीज देखे हैं। 35 मरीजों को वायरल है। डॉ. अनिल कुमार ने बताया, 70 मरीजों को देखा गया है, जिसमें 50 मरीजों को कोल्ड वायरल है।
सीएचसी पर आई रेशमा, रुखसाना, वसीम ने बताया कि भीड़ की वजह से समय मरीजों को दिखाने में ज्यादा समय लग रहा है। हर काउंटर पर भीड़ हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. रमांशकर यादव ने बताया 58 मरीजों की जांच कराई गई है, जिसमें ज्यादा जांचे मलेरिया की हुई हैं।
सीएचसी मछरेहटा
एक्स-रे के लिए रेफर हो रहे मरीज
सीएचसी मछरेहटा में करीब 200 मरीज आए हैं। इसमें 80 मरीज बुखार व खांसी के मिले। अस्पताल में तीन डॉक्टर नियुक्त हैं। यह सभी उपस्थित मिले। एक्स-रे से संबंधित मरीज सीतापुर अस्पताल के लिए रेफर किए जा रहे थे।
इमरजेंसी में कोई भी मरीज भर्ती नहीं मिला। केवल जननी सुरक्षा के तहत महिलाएं वार्ड में भर्ती थी। अधीक्षक डॉ. कमलेश ने बताया, जननी सुरक्षा के तहत भर्ती महिलाओं को ही भोजन देने की व्यवस्था है। सभी को रोजाना भोजन दिया जा रहा है।
सीएचसी रेउसा
दवाई के लिए मेडिकल स्टोर्स पर भीड़
सीएचसी रेउसा में अधीक्षक समेत सिर्फ दो चिकित्सक तैनात है। इसकी वजह से यहां पर लोगों को इलाज कराना मुश्किल हो रहा है। सुबह के समय मरीजों की काफी भीड़ मिली। अधीक्षक ने बताया छह चिकित्सक होने चाहिए।
वहां के एक कर्मचारी ने बताया आरबीएसके की टीम कभी कभार आती है। वह हाजिरी लगाकर निकल जाती है। चिकित्सकों द्वारा अस्पताल के बाहर की दवाएं लिखी जा रही थी। इससे बाहर के मेडिकल स्टोरों पर काफी भीड़ रही। मरीजों ने बताया कि डॉक्टर अधिकतर दवाएं बाहर से ही लिखते हैं।
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