पिसावां/सीतापुर। अपनों से प्रताड़ित महिलाओं को न्याय व सुरक्षा दिलाने के लिए गठित नारी अदालत बड़ी ताकत बनकर उभरी है। इन अदालतों में न तो कोई जज है न ही वकील, सिर्फ महिलाएं ही दूसरों के मामले कुछ ही देर में निपटा देती हैं। अगर जरूरत पड़ती है तो अफसरों की भी राय ली जाती है। इस अदालत में अब तक करीब पांच हजार मामले निपटाए जा चुके हैं। महिलाओं का इन अदालतों में विश्वास बढ़ता जा रहा है।
महिला समाख्या ने जिले में नारी अदालतों का गठन किया है। समूह की महिलाएं दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा व अन्य मामलों में पति व ससुरालीजनों से प्रताड़ित महिलाओं को न्याय दिला रही हैं। उनकी सुरक्षा के लिए निगरानी भी करती हैं, जिससे महिलाएं सशक्त हो रही हैं। अब तक तमाम मामलों का निस्तारण नारी अदालत में हो चुका है।
नारी अदालत में निस्तारित होने वाले मामलों में महिला पूरी तरह सुरक्षित व संतुष्ट है। नारी अदालत आर्थिक रूप से कमजोर उन महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है जो कोर्ट कचहरी का खर्च नहीं उठा पाती हैं। यह अदालतें जिले में बिसवां, परसेडी, गोंदलामऊ, मछरेहटा, मिश्रिख, पिसावां व महोली में चल रही हैं।
मामले सुलझाने की प्रक्रिया
महिला समाख्या की नींबू कली का कहना है कि इन अदालतों में जब एक पक्ष अपना केस लेकर आता है तो अदालत की सदस्य विपक्षी को नोटिस भेजकर तलब करती हैं। दोनों पक्षों की बातें सुनकर निष्पक्ष रूप से फैसला किया जाता है। नारी अदालत में अधिकतर पति-पत्नी के बीच मनमुटाव, घरेलू हिंसा, बंटवारा, प्रेम विवाह, छेड़छाड़, अंतर जातीय विवाह, बाल विवाह व दहेज संबंधी मामलों की सुनवाई की जाती है।
बिना बजट के चल रही नारी अदालत
नारी अदालत पिसावां की प्रमुख नींबू कली ने बताया कि नारी अदालत बिना बजट के चल रही है। सीतापुर में इस नारी अदालत की शुरुआत 2005 में हुई थी। तब से अब तक करीब पांच हजार मामलों को सुलझाया जा चुका है। एक ऐसी अदालत जहां महिलाएं ही महिलाओं के मुद्दे बिना पैसे के सुलझाती हैं। दोनों पक्षों के मुद्दे लिखे जाते हैं और फिर आपसी सहमति से फैसला लिया जाता है।
मामला कठिन होने पर संबंधित अधिकारी कर्मचारी का सहयोग लिया जाता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को जोड़ने के लिए शुरुआत में बहुत मुश्किलें सामने आई हैं। जब पहली बार महिलाओं को जोड़ने निकले तो पुरुषों ने हमें देखकर घर के दरवाजे बंद कर लिए। महिलाएं घर में कैद हो गईं लेकिन अब पुरुषों में भी नारी अदालत के प्रति विश्वास बढ़ा है।