सीतापुर। नहाय-खास के साथ मंगलवार से लोक आस्था के महापर्व छठ का आगाज हो गया। श्रद्धालुओं ने घरों की सफाई कर तालाब व नदी के घाट पर सामूहिक रूप से स्नान किया। यहां से कलश में जल भरकर उसे घरों में स्थापित किया। कद्दू भात का प्रसाद बनाकर इसे ग्रहण करने के बाद व्रत की शुरुआत की। व्रती महिलाओं ने छठ मइया के मंगल गीत गाए। चार दिवसीय छठ पूजा को लेकर महिलाओं और बच्चों में खासा उत्साह नजर आ रहा है।
जहांगीराबाद प्रतिनिधि के अनुसार यह पर्व खासकर संतान की कामना तथा परिवार में सुख शांति और समृद्धि के लिए किया जाता है। बिसवां शुगर फैक्टरी के निकट हनुमान मंदिर के पास अस्थायी तालाब बनाकर छठ पूजा का त्योहार मनाया जाता है। बिंदा देवी मिश्रा ने बताया कि यह सूर्योपासना का महापर्व है। पहले दिन श्रद्धालु नये वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लेते हैं। इसमें लहसुन प्याज पूर्ण रूप से वर्जित रहता है। इस पर्व में एक खासियत और भी है कि इसमें प्रसाद बनाने में प्रयुक्त होने वाले आटे के लिए पहले गेंहू को साफ कर, धुलकर सुखाया जाता है। इसके बाद उसे कूटकर उसका छिलका उतार दिया जाता है, फिर उसे पिसवाया जाता है। उसका उपयोग खरना और ठेकुआ प्रसाद बनाने में किया जाता है।
महमूदाबाद प्रतिनिधि के अनुसार प्रीति प्रजापति, पिंकी प्रजापति, राधिका सिंह, आरती देवी, सोनी देवी, विंदेश्वरी आदि ने बताया कि छठ पर्व पर मंगलवार को घर की साफ-सफाई और सजावट की गई। आंगन को साफ-सुथरा कर मिट्टी के बने चूल्हे पर प्रसाद तैयार किया जा रहा है। पूजा के लिए बांस का सूप, डलिया, लौकी, गन्ना तोराई, कद्दू, फल नारियल आदि खरीदा जा रहा है।
घाट की सफाई की गई
महमूदाबाद (सीतापुर)। नगर के प्राचीन संकटा देवी मंदिर स्थित घाट पर छठ पूजा के लिए सफाई शुरू कर दी गई है। अधिशासी अधिकारी शैलेंद्र दुबे ने मंगलवार को घाट का निरीक्षण किया। बिजली पानी व साफ-सफाई की व्यवस्थाओं को लेकर कर्मचारियों को निर्देश दिए। ईओ ने बताया कि छठ पूजन को लेकर घाट पर काफी संख्या में महिलाएं एकत्र होंगी। इसलिए व्यवस्थाएं चाक-चौबंद की जा रही हैं।