सीतापुर। जन शिकायतों के निस्तारण में अफसरों की लापरवाही जारी है। पूर्व में तमाम अधिकारियों को जवाब तलब करने पर भी सुधार नहीं हो रहा है। निर्धारित समय में आईजीआरएस सहित अन्य प्रकरणों का निस्तारण न करने पर एडीएम न्यायिक ने जिला गन्ना अधिकारी समेत 13 अफसरों से स्पष्टीकरण तलब किया है। उन्हें डिफाल्टर प्रकरणों के संबंध में तीन दिन में स्पष्टीकरण देना है।
जनता की शिकायतों का समय से गुणवत्तापरक निस्तारण किया जाना चाहिए। जिससे लोगों को समस्याओं के लिए भटकना न पड़े। इस संबंध में शासन के कड़े निर्देश हैं। डीएम विशाल भारद्वाज द्वारा बैठकों के माध्यम से साथ ही मौखिक रूप से अफसरों को जन समस्याओं के निस्तारण के संबंध में निर्देश दिए जाते हैं। बावजूद इसके अफसरों की कार्यशैली में सुधार नहीं आ रहा है। इससे पीड़ित पक्ष न्याय के लिए भटक रहा है। निर्धारित समय में मामले निस्तारित नहीं हो पा रहे हैं, जबकि लगातार समीक्षा की जाती है।
14 दिसंबर को एडीएम न्यायिक प्रभारी अफसर आईजीआरएस हरिशंकर लाल शुक्ल ने आईजीआरएस पोर्टल पर प्रदर्शित सूचना में पाया कि 107 प्रकरण निर्धारित समय के बाद लंबित हैं। ये मामले 13 अफसरों ने समय से नहीं निस्तारित किए हैं। डिफाल्टर प्रकरणों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अफसरों को स्पष्टीकरण जारी किया गया है। एडीएम न्यायिक हरिशंकर लाल शुक्ल ने बताया कि संबंधित अफसरों को स्पष्टीकरण तीन दिन में उपलब्ध कराना है।
इन अफसरों से मांगा गया स्पष्टीकरण
निर्धारित समय में सर्वाधिक शिकायतों का निस्तारण न करने पर बाल विकास परियोजना अधिकारी महमूदाबाद से स्पष्टीकरण मांगा गया है। साथ ही जिला गन्ना अधिकारी, एक्सईएन विद्युत, सीडीपीओ बिसवां, पिसावां और रेउसा, खंड शिक्षा अधिकारी सकरन, एआईजी स्टांप, एसडीएम बिसवां, एक्सईएन सिंचाई जल संसाधन, प्राचार्य जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, पूर्ति निरीक्षक सिधौली और बिसवां से स्पष्टीकरण मांगा गया है।