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यूक्रेन से घर लौटा एक और छात्र

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सिधौली से यूक्रेन से सकुशल वतन वापसी कर घर लौटे मृत्युंजय चौरसिया को लड्डू खिलाती मां। - संवाद - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। यूक्रेन में छिड़े युद्ध में फंसे जिले के विद्यार्थियों की सकुशल वापसी हो रही है। सिधौली इलाके का एक और युवक शनिवार को घर पहुंच गया है। इससे घर में खुशियों का माहौल है। युवक ने मंदिर जाकर भगवान का शुक्रिया अदा किया। अब तक तीन विद्यार्थी घर आ चुके हैं। सिधौली का एक युवक स्लोवाकिया से फ्लाइट पकड़ चुका है। तंबौर इलाके की बिटिया घर वापसी के लिए फ्लाइट से आ रही है।
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बिसवां व शहर का युवक अभी वापस नहीं आए है। उनके परिजन बराबर संपर्क में बने हुए हैं। ये लोग भी वहां पर सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। शहर के घूरामऊ बंगला निवासी कौटिल्य विष्णु घर परिवार के संपर्क में बने हुए है। वह स्लोवाकिया व हंगरी बॉर्डर के समीप शरण लिए हुए हैं। बिसवां के शादाब की भारत वापसी अभी तक नहीं हो पाई है।
चाचा हसीब अख्तर ने बताया कि हंगरी में लगातार शादाब भारतीय दूतावास के संपर्क में है। घर वापसी की जद्दोजहद में लगा हुआ है। जल्द ही उसकी भारत वापसी होगी। शादाब यूक्रेन की राजधानी कीव में फंस गया था। वह कीव में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था।
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स्लोवाकिया से रवाना हुई तान्या
तंबौर (सीतापुर)। तंबौर क्षेत्र के रिहार की तान्या पांडेय वतन वापसी के लिए फ्लाइट में सवार हो चुकी है। जिनके देर रात तक नई दिल्ली पहुंचने की संभावना है। तान्या खरकीव मेडिकल यूनिवर्सिटी के बंकर में फंसी रहने के बाद भारत सरकार के प्रयासों से वह शुक्रवार बार्डर पार करके स्लोवाकिया पहुंची थी। जिन्हें शनिवार शाम पांच बजे वहां से फ्लाइट में बैठा दिया गया है। चाचा विजय पांडेय ने बताया कि बिटिया सीधे नई दिल्ली आएगी। वहां से वह लखनऊ स्थित पापा के मकान में पहुंचेगी। एक दो दिन बाद उसे गांव लाया जाएगा।
सुमी व खारकीव में फंसे है तमाम छात्र
सिधौली (सीतापुर)। यूक्रेन से सकुशल वतन वापसी कर घर लौटे मृत्युंजय चौरसिया ने भारत सरकार का आभार जताया है। शनिवार की दोपहर कस्बे के प्रेमनगर निवासी अशोक चौरसिया व आशा चौरसिया ने पुत्र मृत्युंजय चौरसिया के सकुशल घर पहुंचने पर खुशी से झूम उठे। मृत्युंजय ने बताया कि यूक्रेन में रोमानिया बार्डर नजदीक होने से वहां पर भारतीय छात्र काफी अधिक संख्या में एकत्र हो गए थे। जिसके कारण समस्या उत्पन्न हो गई थी। भारत सरकार के प्रयासों से स्थितियां संभाली गई।
उन्होंने युद्ध के हालातों पर चिंता जाहिर की और कहा कि अब भी कई भारतीय सुमी और खारकीव शहर में फंसे हुए हैं। मृत्युंजय चौरसिया ने कस्बे के सिद्धेश्वर मंदिर पर पहुंचकर पूजा अर्चना की। वहीं कस्बे के बाजार मोहल्ले के निवासी आदित्य प्रताप सिंह ने फोन पर बताया कि वे फ्लाइट से दिल्ली आ रहे हैं और जल्द अपने घर पहुंच जाएंगे।
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