पैथोलॉजी और ओटी में बाल्टी से ले जाना पड़ रहा पानी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में बेपटरी हुई व्यवस्था सुधर नहीं रही है। भर्ती मरीज और अस्पताल के आवास में रहने वाले लोग पानी के लिए परेशान हैं। उन्हें बाहर से पानी खरीदकर लाना पड़ रहा है। अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर और प्लास्टर रूम में स्वास्थ्य कर्मियों को बाहर से बाल्टी में पानी पहुंचाना पड़ रहा है। कई बार मरीज के परिजनों को बाहर से बाल्टी में पानी भरकर ले जाना पड़ रहा है, तब जाकर काम हो रहा है। जलापूर्ति प्रभावित होने से इमरजेंसी से लेकर हर वार्ड में समस्या खड़ी हो गई है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में इमरजेंसी, जनरल, सर्जिकल, बर्न, पीआईसीयू, एसनसीयू और प्रसूता वार्ड में नियमित 250 से अधिक मरीज भर्ती रहते हैं। इतने ही तीमारदार रहते हैं। ओपीडी के समय में सुबह आठ से 10 बजे तक दो हजार से अधिक लोग अस्पताल में आते-जाते हैं। लेकिन इन लोगों को अस्पताल में पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। कारण पिछले एक माह से अस्पताल में जलापूर्ति के लिए लगा मोटर खराब हो है।
अस्पताल के किसी भी वार्ड में सप्लाई न होने से पीने के पानी के साथ ही मरीजों के साथ रहने वालों को स्नान व शौच के लिए पानी का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है। पीने के लिए लोग 20 रुपये बोतल पानी खरीद कर ला रहे हैं। वहीं कई दिनों से भर्ती मरीज पानी का जार खरीदने के लिए विवश हैं। पंचगवा निवासी महेश कुमार ने बताया कि वह भाई को लेकर तीन दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। पीने के लिए तो बोतल का पानी खरीद ले रहे हैं, लेकिन स्नान करने में भी परेशानी हो रही है। अस्पताल में कोई व्यवस्था नहीं है।
रमेश कुमार ने कहा कि उनकी मां के पैर में चोट लगी है। अस्पताल में वह दो दिन से हैं। अस्पताल में पानी की किल्लत है। कोई ध्यान देने वाला नहीं हैं। जिम्मेदार समस्या से अनजान बने हुए हैं। मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. एके झा ने बताया कि काम चल रहा है, समस्या जल्द ही दूर हो जाएगी। पानी की किल्लत से निजात मिल जाएगी।
आवास में रहने वाले हलकान
अस्पताल परिसर में रहने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को पानी का जार खरीदना पड़ रहा है। स्वास्थ्यकर्मी के परिवार के सदस्य गोलू पासवान, मो. रफीक और प्रदीप मिश्र ने बताया कि यह समस्या काफी समय से है। पहले गंदा पानी आता था। अब मोटर खराब होने से जलापूर्ति ठप है। पीने के लिए जार और बोतल का पानी खरीदना पड़ रहा है। सुबह पानी खरीदने के लिए लोग स्कूटी और अन्य वाहन से दो किलोमीटर दूर शहर के अंदर जाते हैं, तब जाकर पानी मिलता है। इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।