बर्तनों को रगड़ कर धोएं, नहीं तो तीन साल तक डेंगू का खतरा
सिद्धार्थनगर। स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू से बचाव के लिए नगर पंचायतों में विशेष अभियान शुरू किया है। कस्बे में खाली पड़े डस्टबिन और अन्य पात्रों में जमा पानी को विभाग घूम-घूम कर साफ करा रहा है। विभाग के अनुसार, मच्छर साफ पानी में प्रजनन करते हैं। इसी से डेंगू फैलने की आशंका रहती है। इस लिए जमा पानी वाले पात्रों को रगड़कर धुलें। ठीक से पात्रों की सफाई न होने से अंडे पात्र में रह जाते हैं। यह तीन साल तक प्रभावी रहते हैं।
जिला मलेरिया अधिकारी सुनील चौधरी ने बताया कि गांव-गांव आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से जनसमुदाय को बीमारी से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है। जुलाई से सितंबर माह तक डेंगू प्रभावी रहता है। डेंगू का असर छोड़ने वाला मच्छर राजा होता है। यह साफ पानी वाले जमा पात्रों में प्रजनन कर लार्वा छोड़ देता है। यहीं से डेंगू का खतरा बढ़ता जाता है। नगर पंचायतों में बहुत से जगहों पर खाली पड़े डस्टबिन, कंडम पात्र कई-कई माह से पड़े हैं। इन्हें कोई साफ करने वाला नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी पानी जमा वाले पात्रों को साफ कराने में जुटा है। नगर पालिका नौगढ़ के स्टोर में पड़े डस्टबिन व अन्य पात्रों की सफाई कराकर अभियान की शुरूआत की गई है।
पात्र सूखने के बाद भी रहते हैं अंडे
मच्छर साफ पानी वाले पात्रों में प्रजनन कर अंडे छोड़ते हैं। किस पात्र में अंडे हैं, हमें इसकी जानकारी नहीं रहती। इस लिए सभी पात्रों की रगड़कर सफाई जरूरी है। पात्र को सिर्फ धुल कर रख देने से अंडे का असर पात्र सूखने के बाद भी बना रहता है। यह तीन साल तक प्रभावी रहता है। इसे ध्यान में रखते हुए फ्रीज, कूलर, एसी से निकलने वाले पानी के बर्तन, छतों पर रखे गमले, टायर की रगड़ कर सफाई करें।
अस्पतालों में कराएं डेंगू की जांच
महामारी रोग विशेषज्ञ (एपीडोमोलाजिस्ट) समीर सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर एलाइजा किट उपलब्ध करा रखा है, जबकि जिला अस्पताल में रैपिड डाइग्नोस्टिक जांच किट उपलब्ध है। कोई भी व्यक्ति डेंगू बीमारी होने के संदेह पर अस्पताल पहुंच कर जांच करा सकता है। इसके अलावा डेंगू मरीजों के लिए जिला अस्पताल में 10 बेड के वार्ड बनाए गए हैं। डेंगू के मरीज मिलने पर यहीं भर्ती कर उपचार किया जाएगा।