तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ ने की कार्रवाई
बिना किसी सूचना के अस्पताल से गायब थे दोनों, सही उपचार नहीं मिलने से हुई थी नवजात की मौत
महराजगंज। रतनपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रविवार को नवजात की मौत के मामले में गठित जांच कमेटी ने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेन्द्र कुमार और सीएचसी अधीक्षक डॉ. सुरेन्द्र कुमार को काम में लापरवाही का दोषी माना है। रिपोर्ट के अनुसार, जब गंभीर हालत में बच्चे को अस्पताल लाया गया तब ये दोनों डॉक्टर बिना किसी सूचना के अपने कार्यस्थल पर नहीं मिले, जिस कारण बच्चे को उचित उपचार नहीं मिल सका और उसकी जान चली गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने दोनों डॉक्टरों से स्पष्टीकरण तलब करते हुए उनका नवंबर महीने का वेतन रोकने का आदेश दिया है।
मालूम हो कि शनिवार को परसामलिक थाना क्षेत्र के कोहरगड्डी गांव के छितवनिया टोला निवासी विद्या को परिजन प्रसव पीड़ा होने पर सीएचसी रतनपुर ले गए थे। वहां विद्या ने नॉर्मल डिलीवरी से एक बच्चे को जन्म दिया। रविवार सुबह अचानक बच्चे की तबीयत बिगड़ गई। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीराम वर्मा ने बच्चे का इलाज किया, लेकिन बच्चे को बचाया नहीं जा सका।
बच्चे की मौत से नाराज परिजनों ने सीएचसी में हंगामा कर दिया। इस घटना की खबर अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी। समाचार प्रकाशित होने के बाद सोमवार को जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने सीएमओ से मामले की जांच कराने के निर्देश दिए। इसके बाद सीएमओ ने अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नवनाथ प्रसाद, उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नीरज लाल कन्नौजिया और डॉ. राजेश द्विवेदी की तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। मंगलवार देर शाम जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी।
जांच कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, नवजात की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। घटना के समय सीएचसी रतनपुर के अधीक्षक डॉ. सुरेन्द्र कुमार और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेन्द्र कुमार अपने कार्यस्थल से बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित थे। उनकी अनुपस्थिति के कारण बच्चे को आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सा समय पर नहीं मिल सकी, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ ने दोनों डॉक्टरों का नवंबर महीने का वेतन रोकने का निर्देश देते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है।
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प्रथम दृष्टया दोनों डॉक्टरों की लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आई है। इस पर दोनों का वेतन रोका गया है और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो शासन को विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
डाॅ. श्रीकांत शुक्ल, सीएमओ