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अस्पताल तैयार, तीसरी लहर में नहीं होगी ऑक्सीजन की कमी

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जिला अस्पताल की ओपीडी में कोविड गाइडलाइन का हो रहा उल्लंघन। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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अस्पताल तैयार, तीसरी लहर में नहीं होगी ऑक्सीजन की कमी
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कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन से निपटने के लिए अलर्ट हुआ स्वास्थ्य विभाग
सिद्धार्थनगर। कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन के खतरे से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। दूसरी लहर में ऑक्सीजन की किल्लत को देखते हुए इस बार इसकी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। हालांकि अभी लोग खतरे से अनजान हैं। अस्पताल में कम ही लोग मास्क लगाकर आ रहे हैं। हेल्प डेस्क भी निष्क्रिय हो गया है।
कोरोना की पहली लहर में पूरी व्यवस्था पटरी से उतर गई। महामारी ने जमकर तबाही मचाई। किसी तरह से संक्रमण दर कम हुआ और लोग खुद को सुरक्षित महसूस करना शुरू किया था कि दूसरी लहर आ गई। दूसरी लहर में न जाने कितने लोगों की जान चली गई। ऑक्सीजन की कमी के कारण भी लोगों की जान गई। अब दक्षिण अफ्रीका में कोरोना का नया स्वरूप सामने आया है, जो देश में दस्तक दे चुका है। 200 से अधिक केस मिल चुके हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि इसका प्रसार तेज है और फरवरी तक संक्रमण चरम पर रहेगा। ऐसे में बचाव बेहद महत्वपूर्ण है।
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कोरोना के नए स्वरूप के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। दूसरी लहर की भयावहता को देखते हुए तीसरी लहर से निपटने के लिए दवाओं के साथ ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। 400 बेड की व्यवस्था कर ली गई है, जहां कोरोना मरीजों को भर्ती किया जाएगा। इस संबंध मेें डिप्टी सीएमओ डॉ. सौरभ चतुर्वेदी ने बताया कि कोरोना के नए स्वरूप को देखते हुए तैयारी पूरी कर ली गई है। अस्पताल तैयार है और ऑक्सीजन की भी पर्याप्त व्यवस्था है। स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सतर्क है। हेल्प डेस्क को सक्रिय किया जा रहा है।
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जिले में ऑक्सीजन की तैयारी पर एक नजर
उपकरण संख्या
जम्बो सिलिंडर 134
छोटे सिलिंडर 40
कंसंट्रेटर 830
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जिला अस्पताल
जम्बो सिलिंडर 62
छोटे सिलिंडर 22
कंसंट्रेटर 41
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ऑक्सीजन प्लांट
जिला अस्पताल 100 एलपीएम
एमसीएच विंग 45-45 एलपीएम के तीन
एमसीएच विंग 260 व 570 एलपीएम
बर्डपुर सीएचसी 260 एलपीएम
खतरे से अनजान हैं लोग
कोरोना के तीसरी लहर ने देश में दस्तक दे दी है। विशेषज्ञों का दावा है कि इसका प्रसार भी तेज है, मगर जिला अस्पताल हो या फिर कार्यालय हर स्थानों पर बचाव के लिए स्थापित कोविड हेल्प डेस्क अब निष्क्रिय नजर आ रहे हैं। न तो वहां पर कोई बैठ रहा है न सैनिटाइजर और थमर्ल स्क्रीनिंग की व्यवस्था है।
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