किसानों के खाते में नहीं थी रकम, अब मुआवजा से होंगे वंचित
सिद्धार्थनगर। जिले के ज्यादातर किसान प्रधानमंत्री फसल सुरक्षा योजना के अंतर्गत मुआवजा से वंचित हो जाएंगे। किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए कृषि ऋण प्राप्त करने वाले किसान भी बाढ़-बारिश के नुकसान से हुई क्षतिपूर्ति प्राप्त नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उनके बैंक खाते में बीमा प्रीमियम से कम रकम होने के कारण उनकी फसल का बीमा नहीं हो पाया।
राजस्व विभाग के अनुसार, जिले में बाढ़ प्रभावित 143 ग्राम पंचायत के 6735 बीमित किसानों के ही फसल के नुकसान की रिपोर्ट पहुंची है। जिले में बाढ़ एवं बारिश से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए राजस्व विभाग की रिपोर्ट पर कृषि विभाग ने सर्वे टीम गठित कर दी। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों के बैंक खाते में क्षतिपूर्ति भेजी जाएगी, जबकि आपदा से हुई आंशिक क्षति के मामले में भी मुआवजा देने का नियम है। जिले में महज 40613 किसानों की फसल का बीमा किसान क्रेडिट योजना के अंतर्गत हुआ है, जबकि 473 लोगों ने स्वयं आवेदन करके अपनी फसल का बीमा कराया है।
धान की लागत मूल्य का डेढ़ प्रतिशत राशि जमा करके बीमा कराने का नियम है। धान की फसल मेें प्रति हेक्टेयर 60575 रुपये लागत मूल्य को मानक माना जाता है। कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि बीमित किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा देने के लिए सर्वे किया जा रहा है। किसान क्रेडिट कार्ड वाले किसानों का भी फसल बीमा नहीं हुआ है।
इस लिए नहीं हो सका फसल बीमा
कृषि विभाग की ओर से किसानों को फसल बीमा के लिए जागरूक किया जाता है, लेकिन ज्यादातर किसानों ने बीमा नहीं कराया है। किसान क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत 61174 किसानों ने कृषि ऋण प्राप्त करके खेती की थी, लेकिन इनमें भी 5561 किसानों का फसल बीमा नहीं हुआ है, क्योंकि इसका प्रमुख कारण था कि प्रीमियम कटौती के दौरान इनके बैंक खाते में प्रीमियम से कम रकम थी। आमतौर पर बैंक में आवेदन करते समय ही बीमा का फार्म भी भरवाया जाता है, लेकिन केसीसी वाले किसान भी बीमा की सुविधा से वंचित हो गए। 31 जुलाई तक जमा हुए बीमा शुल्क को 15 अगस्त तक वेबसाइट पर अपलोड करना था।
राजस्व विभाग भी करेगा सर्वे
प्रधानमंत्री फसल सुरक्षा बीमा के अलावा राजस्व विभाग की नुकसान का सर्वे करेगी। एडीएम सीताराम गुप्ता ने बताया कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद सर्वे शुरू किया जाएगा। एक हेक्टेयर धान की फसल बर्बाद होने पर 13500 रुपये मुआवजा देने का नियम है। जिन किसानों की फसल का बीमा नहीं हुआ है, उन्हें भी ये क्षतिपूर्ति प्राप्त होगी।