राधेश्याम शुक्ल ने बताया कि दूसरी कंपनी का टीका लगा तो एक सप्ताह तक चिंता ज्यादा थी लेकिन कुछ बुरा असर नहीं हुआ। सरकारी विभाग में लापरवाही से हमें दूसरी कंपनी का टीका लगा है। दूसरे डोज की तारीख से 28 दिन बाद मेरी एंटीबॉडी की जांच होनी चाहिए।
गोपाल गुप्ता ने कहा कि टीकाकरण में लापरवाही में डॉक्टर और एएनएम के खिलाफ कार्रवाई से हमें कोई फायदा नहीं हुआ। यह विभाग का काम था, विभाग ने किया। इस टीके का हमारे शरीर पर क्या असर हुआ, इसकी वैज्ञानिक तरीके से होनी चाहिए।
शहाबुद्दीन ने कहा कि दूसरी कंपनी का टीका लगने के बाद हमारे शरीर पर तत्काल कोई प्रभाव नहीं दिख रहा है, लेकिन सैंपल चैक करने के बाद ही पता चलेगा कि इससे शरीर पर क्या प्रभाव हुआ। एंटीबॉडी टाइटल कराना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है। यह मांग जायज है।
रामकुमार ने कहा कि एक व्यक्ति को दो कंपनी के टीके लगने के बाद एंटीबॉडी जांच होनी चाहिए। यह शोध का विषय है। सरकार को चाहिए कि राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के वैज्ञानिकों की राय लेकर हमारे स्वास्थ्य की जांच कराए। हमारे सैंपल को दूसरे शहरों में भेजना चाहिए।