मन्नीजोत के पेंड़ारी मुस्ताहकम गांव में बाढ़ के पानी में बच्चों को इलाज के लिए कंधे के सहारे ले ज?
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नाव नहीं मिली, बच्चियों को कंधे पर लेकर गए इलाज कराने
मन्नीजोत। राप्ती की बाढ़ की तबाही बदस्तूर जारी है। भनवापुर ब्लॉक के धनोहरा और पेड़ारी गांव में इलाज नहीं मिलने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। बाढ़ के पानी में लोगों को बच्चों को कंधे पर बैठाकर दो-तीन किमी पैदल जाना पड़ा तो इलाज हो सका।
भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र धनोहरा गांव निवासी संतराम की ढाई साल की नातिन आकृति तथा पेंड़ारी मुस्ताहकम गांव निवासी रामनरेश सोनी की तीन साल की बेटी सिवानी पिछले एक हफ्ते से बीमार हैं। एक दिन पहले सोमवार को उन्होंने अपने गांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में दवा ली थी, लेकिन दोनों बच्चों को आराम नहीं हुआ।
अगले दिन वायरल बुखार हुआ तो उन्हें नाव भी नहीं मिली। संतराम ने बताया कि उन्होंने अपनी नातिन को कंधे पर बैठाकर तीन किमी दूरी तय की तो भनवापुर अस्पताल पहुंचे। जबकि पेड़ारी मस्ताहकम के रामनरेश को दोनों तरफ से आने-जाने में चार किमी दूरी तय करनी पड़ी।
गांव के शानू, नीबर, अवधराम आदि ने बताया कि धनोहरा और पेंड़ारी मुस्ताहकम गांव के लिए एक मोटर बोट दिया गया है, मगर दुर्भाग्यवश कभी किसी जरूरत मंद को वह समय पर नहीं मिलता। हम लोग बाढ़ की त्रासदी झेल रहे हैं। जरूरत पड़ने पर नाव का सहारा नहीं मिल पा रहा है।