कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए होगी पढ़ाई
सिद्धार्थनगर। कोरोना संक्रमण की वजह से बंद चल रहे प्राथमिक विद्यालय एक सितंबर से खुल जाएंगे। घरों में बैठे बच्चे पहुंचेंगे तो एक बार फिर विद्यालयों में चहल-पहल दिखेगी। शासन की ओर से कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए विद्यालय को खोले जाने का आदेश दिया है। इसके बाद से विद्यालयों में पढ़ाई शुरू करने के लिए शिक्षकों ने तैयारी शुरू कर दी है।
कोरोना संक्रमण काल शुरू होने के बाद मार्च 2020 में ही शिक्षा व्यवस्था पटरी से उतर गई थी। पहली लहर पर कंट्रोल हुआ तो माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित विद्यालय शुरू हुए। मगर जब तक विद्यालय पूर्ण रूप से शुरू होते कि दूसरी लहर से कारण फिर बंद हो गए। दूसरी लहर के बाद स्थितियां नियंत्रण में हुई तो सारी गतिविधियों के शुरू करने के साथ ही शासन ने प्राथमिक विद्यालय को भी खोले जाने का आदेश हुआ है। कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए विद्यालयों को संचालित करने का आदेश हुआ। एक सितंबर से विद्यालय खोले जाएंगे।
विद्यालय का संचालन शुरू होने के आदेश के बाद शिक्षकों ने विद्यालय की सफाई और बैठने की व्यवस्था दुरुस्त करने में जुट गए हैं। इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि एक सितंबर से विद्यालय खोले जाने का आदेश हुआ है। कोरोना गाइडलाइल का पालन करते हुए विद्यालय खोलने का बीईओ और शिक्षकों को निर्देश दिया गया है।
जिले में हैं 1924 प्राथमिक विद्यालय
आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 1924 प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें तकरीबन ढाई लाख बच्चे पंजीकृत हैं। लंबे समय बाद विद्यालयों के खुलने के बाद बड़ी तादाद में बच्चे पहुंचेंगे। हालांकि विद्यालय पहले ही तय समय से खुल गए थे, शिक्षक विद्यालय पर आ रहे थे। संक्रमण की वजह से केवल शिक्षक ही जा रहे थे। बच्चों की पढ़ाई पर था, लेकिन अब विद्यालय में शिक्षण कार्य भी शुरू हो जाएगा।
कोरोना गाइडलाइन का पालन
संक्रमण भले ही खत्म हो गया है। मगर विद्यालयों में कोरोना गाइडलाइन का पालन किया। इसमें विद्यालय आने वाले बच्चों के तापमान जांच करने के साथ ही सामाजिक दूरी का पालन करते हुए उन्हें बैठाया जाएगा। साथ ही जो मास्क नहीं लगाकर आएंगे उन्हें मास्क लगाकर आने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्रवेश के दौरान सैनिटाइज किया जाएगा, जिससे संक्रमण न फैलने पाए।
बाढ़ प्राथमिक गांव के बच्चे नहीं जा पाएंगे स्कूल
जिले में बाढ़ का कहर जारी है। तकरीबन दो सौ से अधिक गांव बाढ़ से ग्रस्त हैं। गांव में पानी भरा हुआ है। विद्यालय भी जलभराव के शिकार हैं। ऐसे में इन स्कूलों में बच्चे खुलने के बाद भी नहीं जा पाएंगे।