जेल में बंद भाइयों को राखी नहीं बांध पाएंगी बहनें
सिद्धार्थनगर। भारतीय संस्कृति में भाई और बहन के बीच अटूट संबंध बनाने में रक्षाबंधन की डोर का अहम योगदान है। भाई कैसा भी हो, लेकिन बहन के लिए वह आदर्श होता है और वह प्रेम की डोर को मजबूत करने के लिए रक्षाबंधन बांधती हैं। जेल में बंद भाइयों को हर वर्ष उनकी बहनें राखी बांधती हैं। मगर कोरोना ने रक्षाबंधन की डोर को कमजोर कर दिया। इस बार बहनें जेल बंद भाइयों की कलाई पर राखी बांधने और उन्हें आशीर्वाद देने से वंचित रह जाएंगी। कारागार मुख्यालय ने इस संबंध में पत्र जारी करते हुए निर्देश दिया है कि कोई भी जेल में प्रवेश नहीं कर सकेगा। जेल के बाहर हेल्पडेस्क स्थापित करके चेकिंग के बाद अंदर जाएगा मिठाई और रक्षाबंधन भेजा जाएगा।
तीन अगस्त को पड़ने वाले रक्षाबंधन में जेल में बंद बंदियों को खुद रक्षाबंधन बांधना होगा। कोरोना के संकट को देखते हुए कारागार प्रशासन सतर्क हो गया है। हर वर्ष की तरह से इस वर्ष बहन जेल में बंद अपने भाई को तिलक लगाकर और मुंह मीठा करके रक्षाबंधन नहीं बांध सकेंगी। शासन ने जेल में बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। रक्षाबंधन तीन अगस्त को है। ऐसे में जिले लोगों को रक्षा बंधन बांधना है वे एक अगस्त की सुबह से शाम चार बजे तक लिफाफे में रखकर जिला कारागार के मुख्य द्वार पर बने काउंटर पर दे दें। वहां से संबंधित कैदी के पास चला जाएगा। जेल अधीक्षक राकेश कुमार सिंह ने बताया कि कारागार मुख्यालय से आदेश हुआ है कि जेल में किसी भी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। रक्षाबंधन बांधने के लिए डेस्क बनाया जाएगा। वहां से अंदर भेजा जाएगा। जिला कारागार में रक्षाबंधन देने के लिए लिफाफे में रखा बंधन, मिठाई आदि रखना होगा। उसमें नाम, पता, मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। बाहर और अंदर दोनों स्थानों पर सैनिटाइज करने के बाद संबंधित व्यक्ति को लिफाफा दिया जाएगा।