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नदियां कर रहीं कटान, बोरियां भी हो गईं कम

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नदियां कर रहीं कटान, बोरियां भी हो गईं कम
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। राप्ती, बूढ़ी राप्ती समेत जिले की नदियां लाल निशान से नीचे बह रही हैं। इनके द्वारा किए जा रहे कटान से लोग सहमे हुए हैं। जिले में इटवा क्षेत्र में शाहपुर-सिंगारजोत मार्ग, शोहरतगढ़ क्षेत्र के झुंगहवा-झुलनीपुर मार्ग में राप्ती, उसका क्षेत्र के तिवारीपुर, जोगिया के फत्तेपुर आदि क्षेत्र में बूढ़ी राप्ती नदी कटान कर रही है। शाहपुर-सिंगारजोत मार्ग पर बोरियां कम पड़ जाने से बचाव कार्य ठप है।
बिजौरा प्रतिनिधि के अनुसार, शाहपुर-सिंगारजोत मार्ग के कटान स्थल पर छठवें दिन रविवार को राप्ती की लहरें ज्यादा घातक साबित होने लगी तो बोरियां कम पड़ने के कारण बचाव कार्य बंद हो गया। पहले राप्ती नदी पुल के पश्चिम ओर कटान कर रही थी, जबकि रविवार को पुल से पूर्व दिशा की ओर एप्रोच मार्ग की मिट्टी कटने लगी। काम बंद देखकर स्थानीय लोगों को आक्रोश बढ़ गया था। उन्हेें डर है कि कटान बढ़ा तो मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
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बलरामपुर सिद्धार्थनगर जिले को जोड़ने वाले शाहपुर-सिंगारजोत स्थित राप्ती पुल के पास कटान स्थल पर रविवार दोपहर 12 बजे सन्नाटा नजर आया। जेसीबी खड़ी थी। कुछ बोरियों में ईंट के टुकड़े भरकर रखे हुए थे, जबकि श्रमिक मौके पर नहीं थे। बताया जा रहा है कि बोरियों की कमी से शनिवार शाम से ही बचाव कार्य बंद हो गया है। रविवार शाम पांच बजे तक कार्य शुरू नहीं हो पाया था।
उधर, राप्ती पुल से पश्चिम की ओर 45 मीटर लंबाई में आधी सड़क नदी में विलीन हो गई है। एक स्थान पर सड़क के आधे हिस्से में भी दरार पड़ गई है। कटान स्थल सिद्धार्थनगर में है। पीडब्ल्यूडी बलरामपुर ने सड़क का चौड़ीकरण किया था, इसलिए पीडब्ल्यूडी बलरामपुर की ओर से बचाव कार्य किया जा रहा है।
पीडब्ल्यूडी बलरामपुर के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि कटान स्थल पर 18 हजार बोरियां मंगाई गईं थीं लेकिन बोरियां समाप्त हुई तो रविवार को दस हजार बारियों का बंडल मंगाया गया है। बचाव कार्य में लापरवाही नहीं होगी।
कटान ने बढ़ा दी दूरी
बलरामपुर जिले के पचपेड़वा निवासी अशोक कुमार ने बताया कि वे अपनी स्कॉर्पियो से उतरौला जा रहे थे। 30 किमी दूरी तय करके सिंगारजोत तक पहुंच गए थे लेकिन एप्रोच मार्ग पर कटान के वजह से उतरौला नहीं जा पाए। बलरामपुर निवासी नेबल कुमार ने बताया कि वे सिंगारजोत पुल के रास्ते अपने रिश्तेदारी में डुमरियागंज तहसील के वेंव मुस्तहकम जा रहे थे। उन्हें 40 किमी दूरी तयकर वापस लौटकर डुमरियागंज से होकर रिश्तेदारी में जाना पड़ा। इस कारण 50 किमी दूरी बढ़ गई। कुड़ी निवासी महेश यादव ने बताया कि वे सब्जी व्यवसायी हैं। प्रतिदिन पिकप से सब्जी सिंगारजोत के रास्ते बाजारों में बेचने ले जाते थे। पुल का एप्रोच कटान होने से पुल पर ही सब्जी उतारकर अब ठेले के माध्यम से बाजारों में बेचने गए। उतरौला निवासी कारीगर अफजल ने बताया कि वह अपने टेंपो से इटवा तहसील के बौनाजोत फाटक लगाने जा रहा थे लेकिन जो कटान की वजह से वापस आना पड़ा।
पटरी के रास्ते आना-जाना मजबूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
परसा। बढ़नी ब्लॉक के खैरी उर्फ झुंगहवां से झुलनीपुर में बूढ़ी राप्ती की लहरों से कटान तेज हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क नदी में विलीन हो गई। लोग पटरी के सहारे पैदल गुजरने को मजबूर हैं।
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पीडब्ल्यूडी मार्ग पर तौलिहवा ग्रामसभा के इटहिया टोले के पास कटान से आवागमन पूरी तरह से बंद है। चौधरी निसार अहमद, रफीक एवं कुलदीप ने बताया कि कटान स्थल पर आवागमन शुरू करने के प्रयासों में कमी है। पीडब्ल्यूडी की ओर से कटान के बगल से खड़ंजा बिछाकर अस्थाई रूप से आवागमन चालू करने के लिए कार्य शनिवार से ही शुरू किया गया। यह कार्य धीमी गति से हो रहा है। लोक निर्माण विभाग के जेई संतोष त्रिपाठी ने बताया कि 15 मजदूरों व जेसीबी के माध्यम से कटान स्थल के बगल में खड़ंजा बिछाने के लिए मिट्टी पटाई काम शुरू किया गया है। जल्द से जल्द आवागमन शुरू करा दिया जाएगा।
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