नौगढ़ रेल स्टेशन पर तैनात कर्मचारियों का आवास पूर्ण रूप से जर्जर हो चुका है। सभी आवासों में पानी टपक रहा है। मकान की दशा इतनी खराब है कि वह कभी भी ढहने के कगार पर है। इससे हमेशा बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। इसके साथ ही साफ- सफाई के अभाव में भवन के आसपास झाड़ उग आए हैं। इससे दिन में भी वहां जाने पर लोगों को डर लगता है। समस्या को लेकर आवास में रहने वाले कर्मचारी कई बार जिम्मेदारों को भवन की स्थिति के बारे में बता भी चुके हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार मौन बने हुए हैं, इससे जान जोखिम डाल कर्मचारी जर्जर भवन गुजराने के मजबूर बने हुए हैं।
नौगढ़ रेलवे स्टेशन पर तैनात कर्मचारियों को मिले आवासों के स्थिति अति दयनीय हो गई है। वह कभी भी ढह सकती है। बरसात होने के बाद छत से पानी टपकता है। स्थिति यह है कि जहां पर पानी नहीं रहता है। वहीं बैठकर लोग रात गुजारते हैं। छत से टपकने वाला पूरा पानी घर में जम जाता है और बाहर से भी बारिश के बाद पानी आवास में घुस जाता है। इसके साथ ही बरसात होने के दौरान पानी टपकने से अधिक भय भवन के ढहने का डर बना रहता है। निवास करने वाले कर्मचारी शशिकांत भारती, श्रीकांत, केशवचंद श्रीवास्तव, विजय नाथ गिरि आदि लोगों का कहना है कि बरसात शुरू होने के बाद छत से पानी टपकता है भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। भवन कभी भी ढह सकता है। इसके साथ पूरे परिसर में सफाई के अभाव में झाड़ उग आया है। इससे कभी किसी जानवर के काट लेने का डर बना रहता है। दिन तो किसी तरह ड्यूटी में कट जाता है पर रात को सोते समय पूरी रात डर से करवट बदलना पड़ता है कि कब मकान ढह जाए लेकिन जिम्मेदारों से समस्या को लेकर कई बार अवगत भी कराया गया कि भवन में रहने लायक स्थिति नहीं है। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। जिससे कभी भी बड़ी घटना होने का भय बना हुआ है।
बोले जिम्मेदार
भवन की स्थिति खराब है। उच्चाधिकारियों को इस बारे में रिपोर्ट भेजी गई है। पुन: पत्र भेजकर शीघ्र भवन मरम्मत की मांग की जाएगी।
आशीष कुमार पाठक, प्रभारी स्टेशन अधीक्षक।