हजरत अली की शान में शायरों ने पढ़ा कलाम कसीदा
डुमरियागंज। मौला-ए-कायनात हजरत अली की जयंती के उपलक्ष्य में महफिल मिलाद का सिलसिला चल रहा है। बुधवार की रात ग्राम भटगवा स्थित इमाम बारगाह आले रसूल पर जश्न-ए-मौलूदे काबा महफिल का आयोजन किया गया। इसमें शायरों ने हजरत अली की शान में अपने कलाम व कसीदे पेश किए। कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा।
जश्न-ए-हजरत अली कार्यक्रम का आगाज बादशाह अहमद मौलवी की ओर से की गई। कलाम पाक की तिलावत के साथ हुआ। उसके बाद नाते पाक, शकील अहमद पूर्व प्रिंसिपल ने पढ़ी। फिर नौजवान शायर खुलूस हल्लौरी ने पढ़ा, ‘दुनिया में इस्लाम अली के दम से है, दहर में सुबह शाम अली के दम से है।’ अब्बास फैजी ने सुनाया, ‘बिछाई है जब से हमने अपने घर में फर्श-ए-अजा, हमारे घर में आना-जाना अली का है।’ लकी हल्लौरी ने कहा कि दुनिया अली की है, जमाना अली का है।
इसके अलावा कार्यक्रम में साबिर हल्लौरी, बेमिसाल, आले रजा, फलक हल्लौरी, जिगर हल्लौरी, शादाब आदि ने भी हजरत अली की शान में कलाम-कसीदा पेश किया। जाकिर जमाल हैदर रिजवी ने कहा कि हजरत अली, पूरी कायनात और हर हक पसंद के मौला और इमाम है। उन्होंने कहा कि हजरत अली का जन्म 13 रजब को मक्का शहर में स्थित खुदा के घर खाने काबा में हुआ। मौला अली इल्म का खजाना थे, वे गरीबों, मजलूमों के हिमायती थे। उनकी फजीलत: विशेषता को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। जाकिर जमाल ने लोगों से हजरत अली के बताए हुए सच्चाई, भलाई, नेकी और इंसाफ के रास्ते पर चलने की अपील की। कार्यक्रम का संचालन हैदर हल्लौरी ने किया। इस दौरान आयोजक अहमद रजा मोहम्मद, उम्मीद हैदर, आमिर, पिंटू आदि मौजूद रहे।