गर्मी का बच्चों पर असर, हो रहे बीमारी का शिकार
- अधिक गर्मी और धूप से उल्टी, दस्त व बुखार की समस्या
- ओपीडी में तेजी से बढ़ रही है बच्चों की संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। तेज धूप और उमस भरी गर्मी बच्चों पर भारी पड़ रही है। वह उल्टी, दस्त के साथ ही बुखार के शिकार हो रहे हैं। इन दिनों माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के ओपीडी, इमरजेंसी और पीआईसीयू में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ी है। चिकित्सक इसे मौसम का असर बता रहे हैं, उनका कहना है कि इस मौसम में बच्चों के प्रति बहुत ही सावधान रहने की जरूरत है।
करीब दो माह से बारिश न होने के कारण गर्मी चरम पर है। दिन और रात के तापमान में बहुत अधिक अंतर नहीं हो रहा है। यह मौसम बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के पीआईसीयू और इमरजेंसी मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसके साथ ही ओपीडी में भी बीमार बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है। बालरोग विशेषज्ञ के कक्ष के बाहर बच्चों की भीड़ लग रही है। इसमें 90 प्रतिशत उल्टी, दस्त और बुखार के साथ झटके के मरीज अधिक हैं। सामान्य दिनों में इनकी संख्या जहां पर 100-120 थी। मौजूदा समय संख्या बढ़कर 300 से अधिक हो गई है। चिकित्सक इसे मौसम का असर बता रहे हैं।
शनिवार को बच्चे को इलाज कराने के लिए आए मंगल ने कहा कि पांच वर्ष के बेटे को बुखार है। एक दिन ठंडा पानी पिला दिया तबसे बुखार और जुकाम के साथ ही झटका आने लगा। माया देवी ने कहा कि तीन साल की बेटी दोपहर में निकली इसके बाद बुखार आ गया। सात से दिन से परेशान हैं। पहले बांसी में दवा लिए, अब ठीक नहीं हुआ तो जिला अस्पताल लेकर आना पड़ा। सुनीता देवी ने कहा कि बुखार के साथ ही बच्ची को उल्टी और दस्त हो रहा है। दवा लिए थे फिर भी ठीक नहीं हुआ। मजबूर होकर अस्पताल लेकर आना पड़ा। इसी प्रकार अन्य मरीजों के परिजन ने पीड़ा बताई।
तेज धूप के साथ गर्मी और लू का प्रकोप बढ़ गया है। ऐसे में मौसम में बचाव जरूरी है। इसमें बच्चों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। तेज धूप और उमस भरी गर्मी से बच्चों के शरीर में पानी की कमी के साथ ही उल्टी, दस्त के साथ बुखार के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में उन्हें धूप से बचाने का प्रयास करें। ठंड और गर्म वस्तु न खाने और पीने दें। बाहर की वस्तुओं का सेवन न करने दें। अगर बीमारी होती हैं तो तत्काल चिकित्सक के पास ले जाएं। बिना उनके परामर्श के दवा न खिलाएं। परामर्श के बाद ही दवा खिलाएं।
- डॉ. शैलेंद्र कुमार, बालरोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल सिद्धार्थनगर
---
बोले जिम्मेदार
अस्पताल में जो भी सुविधाएं हैं, उसमें मरीजों का बेहतर इलाज करने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल में आने वाले हर मरीज का इलाज किया जा रहा है।
डॉ. सलिल कुमार श्रीवास्तव प्राचार्य माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर।
---