अनियमितता में नगर पालिका अध्यक्ष को आरोपपत्र
सांसद की शिकायत पर नगर विकास के विशेष सचिव ने भेजा नोटिस
अंत्येष्टि स्थल निर्माण में 43 लाख शासकीय हानि समेत लगे हैं कई आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नगर पालिका सिद्धार्थनगर अध्यक्ष को अनियमितता के मामले में नगर विकास के विशेष सचिव संजय कुमार मिश्र ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसमें मंडलायुक्त की ओर से गठित समिति की जांच रिपोर्ट में अंत्येष्टि स्थल के निर्माण में 43 लाख रुपये की शासकीय हानि करने समेत कई आरोप सिद्ध पाए जाने पर स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। विशेष सचिव ने डीएम को नोटिस तामील कराने के निर्देश दिए हैं। इस आरोपपत्र के आधार पर कार्रवाई होने पर वित्तीय अधिकार छिन सकता है।
सांसद जगदंबिका पाल ने मुख्यमंत्री को दिए शिकायती पत्र में नगर पालिका सिद्धार्थनगर में निर्माण कार्यों में अनियमितता एवं मनमानी तरीके से कार्य कराने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। इसके क्रम में मंडलायुक्त बस्ती ने त्रिस्तरीय समिति गठित कर नगर पालिका के कार्यों की जांच कराई। मंडलायुक्त की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में स्पष्ट हो गया है कि पिठनी पुल के पास विवादित भूमि पर अंत्येष्टि स्थल का निर्माण कराया गया है। इस पर विपक्षी काश्तकार को राज्य वित्त आयोग की धनराशि से 43.66 लाख रुपये मुआवजा देना पड़ा। इस शासकीय क्षति के नगर पालिका अध्यक्ष को दोषी बताया गया है। इसके साथ ही नगर पालिका के पदेन सदस्यों को बैठक में न बुलाने का आरोप भी सिद्ध पाया गया। साथ ही नगर पालिका में ठेकेदारों के पंजीकरण प्रक्रिया में अनियमितता करते हुए नौ आवेदक ठेकेदारों में सिर्फ पांच का ही पंजीकरण किया गया और शेष चार के संबंध में कार्यालय में कोई अभिलेख नहीं पाया गया। मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट पर नगर विकास के विशेष सचिव संजय कुमार मिश्र ने नगर पालिका अध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। इस संबंध में नगर पालिका परिषद चेयरमैन श्याम बिहारी जायसवाल से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
दूसरे गाटे में बना दिया अंत्येष्टि स्थल
नगर पालिका ने पिठनी पुल के पास जिस भूमि में अंत्येष्टि स्थल के निर्माण की स्वीकृति ली थी, उसके बजाए दूसरे के निजी भूमि इसका निर्माण करा दिया। जिस पर निजी भूमि मालिक ने दावा दाखिल कर दिया तो उसे मुआवजा की धनराशि की भुगतान करनी पड़ी। नगर पालिका ने निर्माण स्थल की भूमि के निर्विवादित होने की पुष्टि नहीं की थी, जिससे शासकीय क्षति हुई। अधिवक्ता प्रशस्त उपाध्याय के अनुसार इस मामले में नगर पालिका परिषद के चेयरमैन से वसूली हो सकती है, उनका वित्तीय अधिकार भी छिन सकता है।
कार्यालय के अभिलेखों की भी हुई जांच
मंडलायुक्त की गठित समिति ने सरकारी धन के दुरुपयोग एवं वित्तीय अनियमितता की शिकायतों के स्थलीय सत्यापन एवं जांच के साथ नगर पालिका कार्यालय के अभिलेखों की भी जांच की थी। टीम ने चार अगस्त 2021 को कार्यालय के अभिलेखों की जांच की थी। इसके बाद शिकायत में उल्लिखित आरोपों को पुष्ट करने संबंधी रिपोर्ट शासन को भेजा।
कोट
नगर पालिका परिषद के चेयरमैन को वित्तीय अनियमितता के मामले में नगर विकास विभाग की ओर से भेजा गया आरोपपत्र तामील करा दिया गया है। इस मामले में शासन के निर्देश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
-दीपक मीणा, डीएम