फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सस्ते स्वेटर से कैसे ठंड से बचेंगे बच्चे

विज्ञापन
विज्ञापन
सस्ते स्वेटर से कैसे ठंड से बचेंगे स्कूल के विद्यार्थी
विज्ञापन

सिद्धार्थनगर/भनवापुर। परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे कड़ाके की ठंड में कैसे बचेंगे। यह अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। शासन की ओर से स्वेटर, जूता और ड्रेस खरीदने के लिए अभिभावकों के बैंक खाते में धनराशि भेजी जा रही है। मगर यह धनराशि नाकाफी है। अभिभावकों का कहना है कि 400 रुपये में एक जोड़ी स्वेटर नहीं मिल पा रहा है, जो मिल रहा है उसकी क्वालिटी ऐसी नहीं है कि बच्चों को ठंड से बचा पाए। सस्ता स्वेटर पहनकर बच्चे कड़ाके की ठंड से नहीं बच पाएंगे। ठंड बच्चों के लिए मुश्किल भरी होगी।
गांव के बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया कराने और सरकारी विद्यालय में अधिक से अधिक बच्चे पढ़ें। इसके लिए शासन परिषदीय विद्यालयों पर विशेष ध्यान दे रही है। इसमें निशुल्क, ड्रेस, स्वेटर, जूता, मोजा और बैग दे रही थी। मगर गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद शासन ने इस बार इसकी राशि अभिभावकों के बैंक खाते में भेजने का निर्णय लिया। अभिभावकों के खाते में रुपये भी आ रहे हैं। मगर जो रकम आ रहा है, उसमें खरीद कर पाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है जो धनराशि तय की गई है, उतने में एक अच्छा स्वेटर नहीं मिल पा रहा है दो की तो बात ही दूर है।
विज्ञापन

भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के मन्नीजोत गांव निवासी अभिभावक सच्चिदानंद मिश्र ने कहा कि हमारी लड़की आरोही प्राथमिक विद्यालय मंगराव में कक्षा एक की छात्रा है। इसके पहले सरकार टेंडर प्रक्रिया के तहत बच्चों को स्कूल में ही दो जोड़ी गणवेश ड्रेस, एक जोड़ी स्वेटर के साथ जूता, मोजा टाई आदि दिया जाता था। मगर इस बार सरकार ने खाते में 1100 रुपये भेज रही है जो अभी तक हमारे खाते में नहीं आया, लेकिन ग्यारह सौ रुपये में स्वेटर ड्रेस आदि खरीदना मुश्किल है। सेमरा बनकसिया गांव निवासी लेखराम मिश्र ने कहा कि हमारा लड़का अंश मिश्र प्राथमिक विद्यालय सेमरा बनकसिया का छात्र है।
सरकार का 1100 रुपये खाते में आ गया। कल मैं उसके लिए स्वेटर ड्रेस जूता खरीदने गया था। जहां दुकानदार ने कुल 1900 रुपये जोड़कर बताया। पैसा कम होने के कारण बिना स्वेटर के ही वापस आ गया। जो रुपये स्वेटर के लिए आया है, उस राशि में अच्छी क्वालिटी का स्वेटर खरीद कर पाना मुश्किल है। दुआ शनिचरा गांव निवासी दिनेश पांडेय ने कहा कि हमारी लड़की कक्षा छह में कंपोजिट विद्यालय बिजवार बढ़ई में पढ़ती है। जो रुपये सरकार की ओर से दिया गया है। उसमें स्वेटर आदि सामग्री खरीद करना पाना मुश्किल है। दुकान में अच्छे क्वालिटी के स्वेटर की कीमत 400-500 रुपये है। जबकि सरकार एक जोड़ी का 400 रुपये दे रही है। ऐसे में वह स्वेटर पहनकर बच्चे ठंड से बच भी नहीं सकते हैं। कलीचक गांव निवासी नौशाद ने कहा कि हमारी लड़की शमा परवीन प्राथमिक विद्यालय महुआ खुर्द में कक्षा दो में पढ़ती है। सरकार द्वारा ड्रेस जूता मोजा स्वेटर आदि का रुपये बैंक खाते में दिया जा रहा है जो राशि दी गई है, उसमें अच्छा स्वेटर नहीं मिल पा रहा है। महंगाई को देखते हुए धनराशि देनी चाहिए।
इस संबंध में बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि धनराशि तय करना, भेजा जाना शासन की मंशा है। रही बात अभिभावकों के खाते में रुपये नहीं जाने की तो वह काम चल रहा है। अभिभावकों के बैंक खाते में रुपये जा रहे हैं।
विज्ञापन

जिले में हैं इतने विद्यालय
बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 1924 प्राथमिक विद्यालय है और 743 पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। इसमें 3.54 लाख बच्चे कक्षा एक से आठवीं तक पंजीकृत हैं। जिनके अभिभावकों के बैंक खाते में रुपये जाना है। मगर अभी तक 50 प्रतिशत अभिभावकों के बैंक खाते में रुपये नहीं गए हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें