डुमरियागंज में बिकने के लिए दुकान पर रखा हर्बल रंग हर्बल रंग।
डुमरियागंज। होली के पर्व पर लोग एक-दूसरे पर जमकर रंग-गुलाल उड़ाते हैं। लेकिन रासायनिक रंगों से लोगों को नुकसान का खतरा भी बना रहता है। हालांकि आजकल बाजार में हर्बल रंग भी मिल रहे हैं। इससे आपके स्वास्थ्य का खतरा नहीं रहता है।
डुमरियागंज निवासिनी दीपा कौशल बताती हैं कि होली में बाजार का रंग इस्तेमाल नहीं करती हैं। हर साल खुद ही रंग बनाती हैं। मोनिका बताती हैं कि इस बार उनके परिवार में हर्बल रंग बनाया जा रहा है। घर में बनाए जाने वाले रंग गुलाल से कोई नुकसान नहीं होता है। डुमरियागंज की रुबी कसौधन का कहना है कि रासायनिक रंगों से कुछ लोगों को चेहरे पर दाने निकल आते हैं। इसलिए फूलों से बने हर्बल रंग गुलाल का प्रयोग करना चाहिए। सूखा पीला रंग बनाना है तो एक कटोरी में हल्दी और बेसन मिला लें। जिससे चेहरे पर निखार आने लगेगा। आपको पीला रंग गीला बनाना है तो हल्दी को पानी में भिगो दें।
चाहे तो इसमें गेंदा के फूल भी पीसकर मिला सकते हैं। नारंगी रंग बनाने के लिए फूलों का इस्तेमाल करें। इसके लिए टेसू यानी पलाश के फूलों को दो तीन दिनों तक धूप में सुखा लें और सूखी पंखुड़ियां से पाउडर बना लें। अगर गीला रंग तैयार करना हो तो टेसू के फूलों को रात भर के लिए पानी में भिगोकर रखें। फिर उसे उबालकर रंग बना लें। लाल के बाद हरा रंग सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। हरा रंग बनाने के लिए मेथी या पुदीना की पत्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इन पत्तियों को धूप में सुखाकर मिक्सी में पीसकर पाउडर बना लें। अगर गीला हरा रंग बनाना है तो हरे पत्तेदार सब्जियों को उबालकर उनका लेप बना सकते हैं।
घर पर कैसे बनाएं हर्बल रंग
नगर की दीपमाला कहती हैं कि होली पर लाल रंग लगाना लोगों को ज्यादा ही पसंद होता है। आप घर पर होली के लिए लाल रंग बना सकते हैं। इसके लिए आटे में लाल चंदन पाउडर मिला दें। आपके पास चंदन पाउडर ना हो तो सिंदूर का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपको गीला रंग बनाना है तो आप चुकंदर को रात भर पानी में भिगोकर रख दें। चुकंदर की जगह आप गुड़हल के फूल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
केमिकल के रंगों के इस्तेमाल से होती है स्किन एलर्जी
डॉ. मुहम्मद मुस्तकीम अंसारी ने बताया कि होली के केमिकल युक्त रंगों से त्वचा पर एलर्जी होना आम है। इसके अलावा चकत्ते या जलन पैदा हो सकती है।
रासायनिक रंगों से आंखों की रेटिना भी हो सकती है प्रभावित
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. तनवीर रिजवी ने बताया कि रंगों में कई तरह के केमिकल्स का उपयोग किया जाता है। अगर यह आंख में घुस गया तो इससे रेटिना को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा आंखों का संक्रमण भी हो सकता है। रंग की वजह से आंखों में रेडनेस हो सकती है, जो आगे चलकर कंजंक्टिवाइटिस और यहां तक कि अंधेपन का कारण भी बन सकती है।