फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसान विरोधी है विधेयक, तत्काल वापस ले सरकार

विज्ञापन
विज्ञापन
‘किसान विरोधी है विधेयक, वापस ले सरकार’
विज्ञापन

कृषि क्षेत्र के तीन विधेयकों के लाने पर किसान संगठनों में उबाल
भाकियू (अराजनैतिक) के कार्यकर्ता विरोध में 21 को करेंगे पंचायत
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। केंद्र सरकार की ओर से कृषि क्षेत्र संबंधी तीन विधेयकों के लाए जाने के विरोध में किसान संगठनों में उबाल आ गया है। जिले के किसान नेताओं ने इसे किसान विरोधी बताते हुए विधेयक को तत्काल वापस लेने की मांग की है। भाकियू के एक संगठन ने 21 सितंबर से आंदोलन करने की घोषणा कर दी।
सरकार ने सोमवार को लोकसभा में कृषि संबंधी आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन व सरलीकरण) विधेयक, कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन व कृषि सेवा पर करार विधेयक पेश किया था। विपक्षी दलों के विरोध और संशोधन की मांग को दरकिनार कर इसे लोकसभा में पास कर दिए जाने से हंगामा खड़ा हो गया है। जिले के किसान संगठनों का कहना है कि इससे अनाज मंडी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और किसान अपनी उपज की बिक्री के लिए व्यापारी के बंधक हो जाएंगे।
विज्ञापन

भाकियू (अंबावता) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पूर्वांचल प्रभारी कपिलदेव राय कहते है कि तीनों विधेयकों में कीमत आश्वासन व कृषि सेवा पर करार विधेयक के तहत खेत में ही खड़ी फसल की बिक्री संबंधी करार हो जाने से किसानों के हाथ बंध जाएंगे। इससे किसान अपनी उपज उचित मूल्य पर कहीं भी बिक्री नहीं कर सकेंगे।
भाकियू (अंबावता) के जिलाध्यक्ष यार मोहम्मद चौधरी कहते है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों विधेयक किसान विरोधी है। इन विधेयकों के माध्यम से सरकार के करीबी पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लागू होने से अपनी उपज की कहीं भी बिक्री का अधिकार किसान से छीनकर पूंजीपतियों के हाथों में सौंप दी जाएगी।
भाकियू (अराजनैतिक) के जिलाध्यक्ष इश्तियाक चौधरी कहते है कि सरकार द्वारा लाए गए कृषि संबंधी विधेयकों के लागू होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। संगठन इसके विरोध में प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर 21 सितंबर को पंचायत लगाकर विरोध जताएगी। सरकार किसान विरोधी इन विधेयकों को तत्काल वापस ले।
विज्ञापन

भाकियू (अराजनैतिक) के जिला महासचिव राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि इन विधेयकों के लागू होने किसान के हाथों से पूंजी निकलकर पूंजीपतियों के हाथों में चली जाएगी। इससे परेशान किसान कृषि कार्य से विरक्त होते जाएंगे, जिससे देश में कृषि उत्पादन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इन विधेयकों वापस न लेने पर आंदोलन किया जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें