ढाई माह की ठंड में सवा सौ लोग आए लकवा की चपेट में
- जांच में सभी मरीज थे हाई ब्लड प्रेशर के शिकार
- चिकित्सकों के मुताबिक पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष बढ़े मरीज
सिद्धार्थनगर। ढाई माह की ठंड में सवा सौ लोग लकवा के शिकार हो गए। लकवा ग्रस्त होने वाले मरीजों में अधिकांश 55 वर्ष की उम्र से अधिक हैं। चिकित्सकों के मुताबिक जांच में सभी हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित मिले। उसी के कारण लकवा का अटैक आया। इसके पीछे ठंड और तनाव भी अहम कारण हैं।
बदलते वक्त के साथ हर इंसान की व्यस्तता बढ़ गई है। कोई काम के बोझ तले तो कोई अन्य समस्याओं के चलते तनाव ग्रस्त है। चिकित्सकों का मानना है कि इस वजह से वह ब्लड प्रेशर का मरीज हो जा रहा है। 40 तक की आयु के लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ने के बाद भी वे थोड़ा संभल जाते हैं, लेकिन 50 से अधिक आयु का व्यक्ति अगर ब्लड प्रेशर का मरीज है और दवा नहीं ले रहा है तो उसके लिए काफी खतरनाक है। कुछ भी सोचने पर दिमागी प्रेशर से रक्त चाप बहुत तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में लकवा मारने की आशंका अधिक हो जाती है। वहीं, ठंड के मौसम में तो स्थिति और गंभीर हो जाती है।
जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर से 22 फरवरी तक 125 से अधिक ऐसे मरीज आ चुके हैं, जिन्हें लकवा मार दिया है। इसमें अधिकांश की उम्र 60 से 80 वर्ष के बीच है। जिनकी गंभीर स्थिति रही, उन्हें गोरखपुर रेफर कर दिया गया। उससे कम उम्र के लोगों को यहीं पर इलाज हुआ और नियमित चिकित्सक की देखरेख में दवा ले रहे हैं। चिकित्सकों का यह भी कहना है कि ठंड में अमूमन मरीज बढ़ जाते हैं।
सभी मरीज हाई ब्लड प्रेशर वाले
चिकित्सकों के मुताबिक जितने भी लकवा के मरीज इमरजेंसी में आए। जांच में सभी का ब्लड प्रेशर 170 से अधिक था, क्योंकि इलाज शुरू होने से पहले ब्लड प्रेशर की जांच होती है। उसकी दवा देने के बाद इलाज शुरू होता है। ऐसे में ब्लड प्रेशर नियंत्रित होना बहुत जरूरी होता है।
चार में से तीन लकवा ग्रस्त
जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात फार्मासिस्ट सुग्रीव चौधरी ने बताया कि उन्होंने पूरी ठंड में ड्यूटी किया है। हर दिन लकवा के मरीज पहुंच रहे थे। 22 फरवरी की रात ड्यूटी पर थे, चार मरीज आए, उसमें तीन को लकवा मारा था। मौसम में गर्म होने के बाद संख्या कुछ कम हुई है।
पिछले वर्ष आए थे दो माह में इतने मरीज
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 में दिसंबर और जनवरी में कुल 81 मरीज ऐसे आए थे, जिन्हें लकवा मारा था। इस वर्ष मरीजों की संख्या बढ़ने के पीछे चिकित्सकों का कहना है कि अत्यधिक ठंड के कारण मरीजों की संख्या बढ़ी है।
ठंड के मौसम में ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होता है तो लकवा का अटैक आ जाता है। इस बार ठंड ज्यादा रही और अत्यधिक समय तक ठंड का असर रहा, इस कारण लकवा के मरीज बढ़ गए। ठंड के सीजन में लकवा और हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीज हैं तो नियमित जांच कराने के साथ चिकित्सक की सलाह पर दवा लेनी चाहिए। अगर लकवा मार देता है और अंग काम नहीं कर रहा है तो बिना देर किए इलाज शुरू कराना चाहिए। लकवा मारने पर नस में खून जम जाता है, इसलिए अंग काम करना बंद कर देते हैं। ऐसे में समय से दवा बहुत ही आवश्यक है। समय पर न्यूरो विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह से दवा शुरू हो जाए तो मरीज को जल्द आराम मिल जाता है।
डॉ. अमित पटेल, न्यूरो सर्जन