शिवयोग में श्रद्धालु करेंगे जलाभिषेक
- महाशिवरात्रि पर बाबा कटेश्वरनाथ, बाबा मुकतेश्वरनाथ, बाबा महेश्वरनाथ सहित अन्य शिवालयों में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए पहुंचेंगे श्रद्धालु
डुमरियागंज /सिद्धार्थनगर। महाशिवरात्रि का पर्व एक मार्च को मनाया जाएगा। इस बार शिवरात्रि पर शतभिषा नक्षत्र व शिवयोग का संयोग बन रहा है, जो शिव भक्तों के लिए मनोवांछित फल देने वाला होगा। शिवरात्रि को लेकर मंदिरों में भी तैयारी शुरू हो गई है। नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में भक्त पूजा-अर्चना के लिए पहुंचेंगे।
महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा कटेश्वरनाथ, बाबा मुकतेश्वरनाथ, बाबा महेश्वरनाथ सहित अन्य शिवालयों में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए आस्था का जन सैलाब उमड़ेगा। नगर स्थित प्राचीन शिव मंदिर के पुजारी पं. राकेश शास्त्री ने बताया कि इस बार पंच ग्रही योग में शिवजी की पूजा होगी। साथ ही महाशिवरात्रि पर दो शुभ संयोग बन रहे हैं। पहले धनिष्ठा नक्षत्र के साथ परिघ योग बनेगा। इसके बाद शतभिषा नक्षत्र और शिव योग का संयोग होगा। परिघ योग में पूजा करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि पर इस बार ग्रहों का विशेष योग भी बन रहा है। 12वें भाव में मकर राशि में पंच ग्रही योग बनेगा। इस राशि में मंगल और शनि के साथ बुध, शुक्र और चंद्रमा रहेंगे। लग्न में कुंभ राशि में सूर्य और गुरु की युति बनी रहेगी। चौथे भाव में राहु वृषभ राशि में रहेगा, जबकि केतु दसवें भाव में वृश्चिक राशि में रहेगा। उन्होंने बताया कि शुभ संयोग और शुभ मुहूर्त में जो जातक विधि-विधान से भोले बाबा की आराधना करेंगे, उनकी मनोकामना जरूर पूरी होगी।
महाशिवरात्रि पर पूजन का मुहूर्त
महाशिवरात्रि के दिन पूूर्वाह्न 11.47 से दोपहर 12.34 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। इसके बाद दोपहर 2.07 से लेकर दोपहर 2.53 बजे तक विजय मुहूर्त रहेगा। पं. राकेश शास्त्री ने बताया कि पूजा या कोई शुभ कार्य करने के लिए ये दोनों ही मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ हैं। शाम 5.48 से 6.12 बजे तक गोधूलि मुहूर्त रहेगा।
इस तरह से करें शिवलिंग का अभिषेक
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के अभिषेक का बड़ा महत्व है। शिवभक्त जल के साथ ही दूध, दही, घी, शहद से भी शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए दीपक जलाएं। मंत्र का जाप करते हुए चंदन का तिलक लगाएं। बेलपत्र, भांग, धतूरा, गन्ने का रस, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र, दक्षिणा चढ़ाएं और जलाभिषेक करें। इसके अलावा रुद्रीपाठ, शिवपुराण, शिवमहिम्नस्तोत्र आदि कथा सुननी चाहिए।