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आलू में झुलसा तो सरसों में बढ़ गया माहू का जोखिम

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खेत में लगा सरसों की फसल। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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आलू में झुलसा तो सरसों में बढ़ गया माहू का जोखिम
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वैैज्ञानिकों ने खेत में पर्याप्त नमी रखने की सलाह दी
डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर)। मौसम के बदले रुख के चलते आलू और सरसों की फसल को लेकर किसान चिंतित हैं। मंगलवार को चटक धूप के बावजूद सर्द हवाएं चलीं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि हवाओं के रुकने के बाद कोहरा दस्तक दे सकता है। इसका असर आलू व सरसों की फसल पर ज्यादा देखने को मिलेगा। आलू की अगेती फसल बड़ी हो गई है। जबकि पछेती फसल में आलू का पनपना जारी है। ऐसे में कोहरे की दस्तक फसल को प्रभावित कर सकती है। यदि कोहरा हुआ तो सरसों की फसल को नुकसान हो सकता है। सर्द हवाओं के ठहराव के साथ कोहरे की चपेट में आने से सरसों की फसल में नुकसान की आशंका बढ़ जाएगी। दिसंबर के दौरान रबी की फसल में सबसे अधिक आलू, सरसों, गेहूं और दलहन फसलों की बुआई की जाती है। इन फसलों पर घने कोहरे और पाले का असर पड़ता है। पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में कड़ाके की ठंड और घना कोहरा पड़ रहा है।
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गांव कटया निवासी निजाम व नगर के हबीबुल्लाह नगर निवासी तुफेल अहमद ने बताया कि यदि इसी तरह घना कोहरा पड़ता रहा तो सरसों की फसल पर माहू (चैपा नामक परजीवी) का जोखिम बढ़ जाएगा। इससे पौधे की पत्ती, फूल आदि भागों में संक्रमण होने की वजह से फल नहीं आता। वहीं, पाला पड़ने से आलू की फसल में झुलसा रोग लग जाता है। इस बीमारी से पौधा पूरी तरह से सूख जाता है और फसल तबाह हो जाती है। किसानों का कहना है कि घना कोहरा गेहूं और दलहन फसलों पर असर डालता है। कोहरे और पाला के कारण फसलों की पैदावार गिर जाती है। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि हवा के करवट लेने के साथ गलन बढ़ी है। एक-दो दिन में मौसम में और ज्यादा परिवर्तन दिखने को मिल सकता है। किसानों को खेतों में पानी का भराव रखना जरूरी है, जिससे इन फसलों पर पड़ने वाले कुप्रभाव से बचाव हो सके।
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