मासूम की मौत के मामले में अस्पताल संचालक की गिरफ्तारी तय
सिद्धार्थनगर/ बांसी। बांसी कस्बे के निजी अस्पताल में करीब चार माह पहले इलाज के दौरान सात दिन के मासूम की मौत के मामले में अस्पताल संचालक की गिरफ्तारी तय हो गई है। पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग की जांच में प्रमाणित हो गया है कि इलाज करने वाला डॉक्टर शिशु रोग विशेषज्ञ/एबीबीएस डिग्रीधारी के बजाय बीएएमएस तृतीय वर्ष का छात्र था। इस मामले में पुलिस ने धारा बढ़ाते हुए गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज करने की तैयारी कर ली है।
जानकारी के मुताबिक बांसी कोतवाली क्षेत्र के बनकटा निवासी अजीत निषाद पुत्र गंगा राम ने 15 जनवरी 2022 को कोतवाली में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उन्होंने लाइफ केयर सेंटर व जच्चा बच्चा केंद्र में सात दिन के नवजात को भर्ती कराया था। इलाज के दौरान लापरवाही के कारण बच्चे की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने पहले कार्य के दौरान दुर्घटना में मौत (304 ए) के तहत केस दर्ज किया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम की जांच में अवैध रूप से अस्पताल संचालित करने का तथ्य सामने आया तो पुलिस ने धारा बढ़ाकर गैर इरादतन हत्या (304) दर्ज करने की तैयारी कर ली है। इस मामले में अस्पताल संचालक की गिरफ्तारी तय हो गई है, जबकि अन्य आरोपितों पर भी कानून की गाज गिरेगी।
कोतवाल संजय कुमार मिश्र ने बताया कि जांच में अस्पताल के संचालन की वैध पत्रावली नहीं मिली है। अस्पताल संचालक ने इलाज करने वाले डॉक्टर की वैध डिग्री नहीं प्रस्तुत की है। ऐसे में अस्पताल संचालक व इलाज करने वाले डॉक्टर के खिलाफ जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
शासन को लिखेंगे पत्र
पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि बांसी में लाइफ केयर सेंटर व जच्चा-बच्चा केंद्र में इलाज में गंभीर लापरवाही सामने आई है। जांच में इलाज करने वाले डॉक्टर की डिग्री वैध नहीं मिली है। इस मामले में गैर इरादतन हत्या के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही आरोपितों की गिरफ्तारी की जाएगी। वे शासन को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण से अवगत कराते हुए जिले के सभी निजी अस्पतालों व जांच सेंटरों के मानकों की जांच की सिफारिश करेंगे।
जांच में फर्जी निकली डॉक्टर की मुहर
सीएमओ डॉ. एके चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छह दिन पहले लाइफ केयर सेंटर व जच्चा बच्चा केंद्र में जांच की थी। जांच में पाया गया कि अस्पताल अवैध रूप से संचालित हो रहा था। कागजात पर जिस डॉक्टर की मुहर लगी रही थी, वह भी फर्जी निकली है। अस्पताल संचालक ने डॉक्टर को जांच टीम के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया है। अस्पताल संचालक को नोटिस दिया गया है कि 15 दिन में पक्ष प्रस्तुत करें लेकिन उसका कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। इस मामले में अस्पताल बंद करने की कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में अस्पताल के संचालक का पक्ष नहीं प्राप्त हो सका है। उनका पक्ष आने पर प्रकाशित किया जाएगा।