सिद्धार्थनगर। खेसरहा ब्लॉक क्षेत्र के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए बनाए गए पांच न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एनपीएचसी) चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों के अभाव में अधिकतर केंद्रों पर इलाज की जिम्मेदारी फार्मासिस्टों के भरोसे है।
हालत यह है कि रात में मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों से मदद नहीं मिल पाती और सामान्य बीमारी के इलाज के लिए भी निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। इससे लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) खेसरहा के अंतर्गत टीकुर, महुलानी, मरवटिया बाजार, घोसियारी बाजार और कठमोरवा न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इन पर आसपास के 100 से अधिक गांवों की स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद अधिकांश केंद्रों पर नियमित चिकित्सकों की तैनाती न होने से ग्रामीणों को अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार कठमोरवा और घोसियारी बाजार स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक तैनात हैं, जबकि टीकुर, महुलानी और मरवटिया बाजार लंबे समय से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में मरीजों का उपचार फार्मासिस्ट कर रहे हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में गंभीर मरीजों को तत्काल रेफर करना पड़ता है।
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब रात में किसी की तबीयत बिगड़ जाती है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को करीब 15 किलोमीटर दूर सीएचसी खेसरहा या फिर बांसी और जिला मुख्यालय स्थित अस्पतालों तक जाना पड़ता है। कई गंभीर मरीजों को बस्ती और गोरखपुर रेफर किया जाता है।