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मौनी अमावस्या पर आज श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी

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मौनी अमावस्या पर आज श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी
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डुमरियागंज। मौनी अमावस्या के शुभ मुहूर्त पर मंगलवार को लोग डुबकी लगाएंगे। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भारतभारी स्थित पवित्र सरोवर और नगर के राप्ती में स्नान के लिए पहुंचेंगे। यह सबसे प्रमुख स्नान पर्व है। इस बार मौनी अमावस्या पर ग्रह नक्षत्रों का विशेष संयोग बन रहा है। इससे पर्व का महत्व बढ़ गया है।
अमावस्या तिथि पर धनु राशि में सूर्य, मंगल व शुक्र का संचरण होगा। मकर राशि में चंद्रमा, शनि और सूर्य का संचरण होगा। पं. राकेश शास्त्री ने बताया कि 27 वर्ष बाद मौनी अमावस्या पर मकर राशि में शनि व सूर्य साथ संचरण करेंगे। यह संयोग 27 वर्ष बाद बन रहा है। इसके साथ दो राशियों में तीन-तीन ग्रहों का संचरण होना अत्यंत पुण्यकारी है। मौन रखकर संगम में स्नान करने वाले को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी। उन्होंने बताया कि 31 जनवरी को दोपहर 1.27 बजे से अमावस्या तिथि लग गई है। यह एक फरवरी को दिन में 11.29 बजे तक रहेगी। मंगलवार होने से भौमवती अमावस्या मनाई जाएगी। सिद्धि योग सुबह 7.10 बजे तक है। इसके बाद व्याघृत योग लगेगा। श्रवण नक्षत्र स्नान पर्व का महत्व बढ़ा रहा है।
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श्रेष्ठ है मौनी अमावस्या तिथि
पं. राकेश शास्त्री ने कहा कि पद्म पुराण में माघ मास की अमावस्या तिथि को श्रेष्ठ बताया गया है। इसमें मौन रखकर नदी में स्नान करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। स्नान के समय ईश्वर का ध्यान करना चाहिए। गाय, कुत्ता व कौआ का संबंध पितरों से माना गया है। अमावस्या पर इनके अपमान से बचना चाहिए। इस दिन पितृ पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन मौन व्रत रखकर पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए खास उपाय किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस दिन पितरों का स्मरण करते हुए उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करें। पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए लोटे में जल लेकर इसमें काले तिल और लाल फूल डालें।
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इसके बाद पितृ देव से प्रार्थना करते हुए सूर्य देव को जल चढ़ाएं। पीपल के पेड़ में जल अर्पित करने के बाद सफेद मिठाई चढ़ाकर इसकी परिक्रमा करें और पितृ देव से अपने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। मौनी अमावस्या के दिन जरूरतमंद को तिल के लड्डू, तिल का तेल, वस्त्र, कंबल और आंवला इत्यादि भेंट स्वरूप दें। मौनी अमावस्या के दिन गायत्री मंत्र का जाप करने पर सूर्य मजबूत होता है। इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होता है। इसके अलावा, जिस प्रकार भगवान की पूजा के अंत में उनसे क्षमा प्रार्थना करते हैं, उसी तरह पितरों से भी जाने-अनजाने हुई गलतियों की क्षमा मांगनी चाहिए। साथ ही अमावस्या के दिन गरीबों को खीर खिलाएं, संभव हो तो गीता का पाठ करें।
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