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Siddharthnagar News: लुंबिनी से बोधगया तक बौद्ध पर्यटन परिपथ की नई रूपरेखा पर मंथन

Tue, 18 Aug 2026 11:06 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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- सिद्धार्थ विश्वविद्यालय और नेपाल की संस्था के बीच पहल, सतत पर्यटन और सीमापार संपर्क के अध्ययन की तैयारी
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सिद्धार्थनगर। भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी से लेकर कपिलवस्तु और कुशीनगर, सारनाथ और बोधगया जैसे प्रमुख बौद्ध स्थलों को व्यापक पर्यटन परिपथ से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। मंगलवार को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु और नेपाल के इंटीग्रेटेड सोशल डेवलपमेंट सेंटर (आईएसडीसी) के बीच इस दिशा में प्रारंभिक विचार-विमर्श हुआ। विश्वविद्यालय में हुई बैठक में दोनों पक्षों ने साझा बौद्ध विरासत को पर्यटन, शोध, संस्कृति और स्थानीय विकास से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह और आईएसडीसी की संस्थापक सदस्य स्वाति थापा के बीच ‘भारत-नेपाल बौद्ध पर्यटन परिपथ के लिए सतत पर्यटन विकास और सीमापार संपर्क का आधारभूत अध्ययन व रूपरेखा’ तैयार करने की अवधारणा पर चर्चा हुई। प्रस्तावित अध्ययन में लुंबिनी और सिद्धार्थनगर क्षेत्र के पर्यटन संसाधनों, मौजूदा सुविधाओं, सीमापार आवागमन, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और रोजगार की संभावनाओं का अध्ययन किया जाना है।
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विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अविनाश प्रताप सिंह के अनुसार बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि लुंबिनी को केवल धार्मिक और तीर्थस्थल के रूप में देखने के बजाय व्यापक बौद्ध पर्यटन परिपथ के केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाए। इसके लिए लुंबिनी-कपिलवस्तु क्षेत्र को कुशीनगर, सारनाथ और बोधगया जैसे स्थलों से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार हुआ।
ऐसे पर्यटन परिपथ में केवल प्रमुख धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि उनसे जुड़े पुरातात्विक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को भी जोड़ा जा सकता है। इससे पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर पर्यटन आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावना बन सकती है। बैठक में विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल सेल के चेयरमैन प्रो. सौरभ सहित अन्य शिक्षक भी मौजूद रहे।
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सीमापार संपर्क को माना अहम
प्रस्तावित अध्ययन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारत-नेपाल सीमा-पार पर्यटन संपर्क रहेगा। पर्यटकों के आवागमन, सड़क संपर्क, परिवहन, ठहरने की व्यवस्था, सूचना सुविधाओं और पर्यटन मार्गों की स्थिति का अध्ययन किए जाने की बात हुई। सीमा से जुड़े क्षेत्रों में पर्यटन बढ़ने पर स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, होटल-रेस्तरां, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद और अन्य सेवाओं में रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। इसलिए अध्ययन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी और आजीविका को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाए जाने की परिकल्पना है। प्रस्तावित साझेदारी में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की अकादमिक एवं शोध विशेषज्ञता को नेपाल की संबंधित संस्थाओं के स्थानीय अनुभव और नेटवर्क से जोड़ने की संभावना पर चर्चा हुई। विश्वविद्यालय की ओर से अकादमिक नेतृत्व, तकनीकी मार्गदर्शन और शोध सहयोग उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

अध्ययन में इन बिंदुओं पर फोकस
- पर्यटन संसाधनों और मौजूदा सुविधाओं का आकर्या।
- भारत-नेपाल सीमा-पार पर्यटन संपर्क का अध्ययन।
- सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी की स्थिति।
- पर्यटकों के ठहराव और बुनियादी सुविधाओं का आकलन।
- स्थानीय समुदाय की भागीदारी।
- रोजगार और आजीविका के अवसर।
- साझा बौद्ध विरासत के संरक्षण की संभावनाएं।
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