शाम होते ही रोडवेज बसे कर देतीं दौड़ना बंद
सिद्धार्थनगर डिपो से भी नहीं मिलती बस, यात्रियों को झेलनी पड़ती दिक्कत
सिद्धार्थनगर। शहर में तेजी से हो रहे विकास कार्यों के बावजूद परिवहन सुविधाएं नदारद है। शाम को सड़क मार्ग से जिले के अंदर अथवा गैर जनपद जाना हो तो सुबह तक इंतजार करना पड़ेगा। शाम सात बजे के बाद प्राइवेट अथवा सरकारी वाहन नहीं मिलने के कारण सिर्फ निजी साधन से ही शहर से बाहर जा सकते है। ऐसे में जरुरतमंद यात्रियों को 12 घंटे इंतजार के बाद ही वाहन मिल पाते हैं।
सिद्धार्थनगर डिपो में 43 बसों का संचालन होता है। परिवहन निगम की बसें सुबह सात बजे से गोरखपुर, बस्ती, लखनऊ, कानपुर समेत जिले के विभिन्न स्थानों तक आती-जाती है। शाम 6:30 बजे लखनऊ चारबाग के लिए अंतिम बस सेवा रहती है। इसके बाद पूरी रात बस उपलब्ध नहीं होती है। यात्रियों को दूसरे दिन सुबह सात बजे गोरखपुर और लखनऊ के लिए बस मिलती है।
यदि जिले के अंदर दूर-दराज क्षेत्र का कोई यात्री रेलवे स्टेशन पर उतरता है तो उसे गंतव्य जाने के लिए सरकारी वाहन के साथ ही प्राइवेट वाहन भी मिलना असंभव है। बुधवार शाम सात बजे गोरखपुर जाने के लिए घर से निकले शहर निवासी कमलेश को न तो स्टेशन पर ट्रेन मिली और न ही रोडवेज पर बस। किसी तरह प्राइवेट वाहन से गोरखपुर जाने की व्यवस्था हो सकी।
अक्सर गोरखपुर एवं लखनऊ जाने वाले बर्डपुर क्षेत्र के अखिलेश एवं जोगिया के रियाज अहमद का कहना है कि अगर रात में वह स्टेशन पर उतरते हैं तो वाहन नहीं मिलने से परेशानी झेलनी पड़ती है। इसी तरह इटवा, डुमरियागंज और बांसी के यात्री परेशानी का सामना करते है। सिद्धार्थनगर डिपो के एआरएम जगदीश प्रसाद का कहना है कि उपलब्ध संसाधन से यात्रियों की सुविधा के अनुसार बसों का संचालन किया जाता है, जहां तक बस सेवा शुरू करने के लिए पर्याप्त यात्रियों की मांग होगी, वहां संचालन शुरू किया जा सकता है।
दो माह में बंद हो गई बस सेवा
एआरएम जगदीश प्रसाद ने बताया कि छह माह पूर्व रात आठ लखनऊ के लिए बस सेवा शुरू की गयी थी। इसका दो माह तक संचालन किया गया, लेकिन पर्याप्त यात्रियों के अभाव और आर्थिक क्षति के कारण बस सेवा बंद कर देनी पड़ी। इस सेवा से कुछ यात्री सफर करते थे, लेकिन वह बांसी और बस्ती तक जाते ही उतर जाते थे। यात्री नहीं होने के कारण बस वहीं खड़ी कर देनी पड़ती थी।