दस साल में भी नहीं बनी पुलिया
-खेसरहा ब्लॉक के मरवटिया बाजार का मामला, सात गांवों के लोगों को है दिक्कत
-2012 में टूट गई थी पुलिया
संवाद न्यूज एजेंसी
खेसरहा। ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत मरवटिया बाजार के टोला बनुहिया खुर्द गांव में टूटी पुलिया दस वर्ष बाद भी नहीं बन सकी है, इस कारण चुनाव में 500 मीटर बूथ तक आने वाले मतदाताओं को तीन किमी दूरी तय करनी पड़ रही है। पुलिया नहीं बनने के कारण गांव के लोगों में नाराजगी हैं, वोट मांगने वाले प्रत्याशियों से वे सवाल भी पूछ रहे हैं कि उनकी समस्या कब दूर होगी।
बनुहिया खुर्द गांव की एक हजार से अधिक की जनसंख्या है, जिसमें लगभग 450 मतदाता हैं। यहां के मतदाताओं को विधानसभा व लोक सभा के मतदान के लिए दूसरे ग्राम पंचायत बनुहिया बुजुर्ग के प्राथमिक विद्यालय पर जाना पड़ता है। नहर के रास्ते विद्यालय की दूरी सिर्फ 500 मीटर है, जबकि मरवटिया, कसिहरा होकर जाने में चार किमी दूर तय करनी पड़ती है। इस कारण कुछ लोग मतदान करने भी नहीं जा पाते हैं। दोनों गांव के बीच में नहर पर बनी पुलिया 2012 में टूटकर गिर गई। इस कारण बनोहिया खुर्द के साथ बनोहिया बुजुर्ग, छपवा, घोड़ीपार, पंचमोहनी, सुबही नगवा सहित सात गांवों के लोग परेशान हो रहे हैं। ग्रामीण रमजान अली ने बताया कि दोनों गांव के बीच नहर पर 2009 में पुलिया का निर्माण कराया गया। मानक की अनदेखी कर पुलिया बनाई गई थी। नहर विभाग व तहसील दिवस में कई बार आवेदन किया गया, लेकिन अभी तक पुलिया नहीं बनाई गई।
मतदान केंद्र दूसरे ग्राम पंचायत में है। वहां पहुंचने के लिए दूसरे रास्ते से होकर जाने में दूरी तय करनी पड़ती है। अधिकारियों से शिकायत के बावजूद भी यहां पुलिया का निर्माण नहीं हुआ। लोगों को दस साल से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रिसाल अहमद
पंचायत चुनाव में गांव के विद्यालय में मतदान केंद्र बनाया जाता है, लेकिन विधानसभा व लोकसभा के चुनाव का मतदान केंद्र दूसरे ग्राम पंचायत के विद्यालय में बनाया जाता है, इसके लिए शिकायत भी हुई थी। पुलिया बन जाए तो सारी समस्या दूर हो जाएगी।
आसिफ अली
टूटी पुलिया के चलते कम संख्या में महिलाएं मतदान करने जाती हैं। नहर का पुलिया टूटने से आधा दर्जन गांवों के लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है। जनप्रतिधियों से गांव लोग पूछ रहे हैं कि पुलिया कब बनेगी।
सर्वजीत उपाध्याय
महिलाओं को होती है दिक्कत
गांव की हाजरा खातून का कहना है कि दूर के मतदान केंद्र पर जाने में महिलाओं को ज्यादा दिक्कत होती है। गांव के अधिकर परिवारों की रोजी रोटी का मुख्य जरिया खेती, पशुपालन और मजदूरी है। यदि पुुलिया बन जाए तो गांव में मतदान करने में लोगों का ज्यादा समय बर्बाद नहीं होता। मतदान केंद्र तक जाने के लिए वाहन आसानी से नहीं मिलता है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता उग्रसेन वर्मा ने बताया कि मरवटिया में जो पुलिया टूटी है, उसे सिंचाई विभाग ने नहीं बनाया था, इसलिए मरम्मत या नई पुलिया बनाने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की नहीं है, जबकि बीडीओ राजकुमार ने कहा कि गांव में पुलिया टूटने की जानकारी उन्हें नहीं है। इस मामले की जानकारी कर पुलिया निर्माण का प्रयास किया जाएगा।