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उच्च और तकनीकी शिक्षा के लिए घर छोड़ने को मजबूर युवा

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उच्च और तकनीकी शिक्षा के लिए घर छोड़ने को मजबूर युवा
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बढ़नी कस्बे में इंटरमीडिएट से आगे की पढ़ाई के लिए नहीं है कोई सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
बढ़नी। नेपाल सीमा से सटा बढ़नी कस्बा व्यावसायिक दृष्टिकोण से बेहद खास होने के बाद भी यहां उच्च शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के उच्च शिक्षण संस्थानों की ओर जाना पड़ता है। छात्र तो किसी तरह से आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए अपना घर छोड़ देते हैं लेकिन छात्राओं के सामने आगे की पढ़ाई जारी रखने में परेशानी होती है। कुछ अभिभावकों को अपनी लड़कियों की सुरक्षा का डर सताता है तो कुछ आर्थिक रूप से कमजोर होने के नाते उनकी पढ़ाई छुड़ा देते हैं। कस्बे के 20 किमी की परिधि में कोई भी उच्च शिक्षण संस्थान नहीं है, जिसके चलते यहां के लोग शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ते जा रहे हैं।
कस्बे में इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद मजबूरी में स्नातक तथा परास्नातक की पढ़ाई करने के लिए घर छोड़ना पड़ता है। यहां उच्च शिक्षण संस्थान न होने से छात्राओं को उच्च शिक्षा हासिल करने में काफी परेशानी होती है।
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प्रियंका
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उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाकर पढ़ने के लिए लड़कियां मजबूर हैं। बढ़नी कस्बे में मात्र गांधी आदर्श विद्यालय इंटरमीडिएट कॉलेज है, वहां से शिक्षा लेने के बाद तकनीकी शिक्षा अथवा उच्च शिक्षा लेने के लिए बलरामपुर, शोहरतगढ़ जाना पड़ता है। आवागमन की बेहतर सुविधा न होने से दिक्कतें होती हैं।
शिखा श्रीवास्तव
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इंटरमीडिएट तक की शिक्षा तो किसी तरीके से यहां हो जाती है, लेकिन कोई उच्च और तकनीकी शिक्षण संस्थान न होने से आगे की पढ़ाई जारी रखने में परेशानी होती है। अभिभावकों के मन में भी सुरक्षा डर बना रहता है फिर भी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करनी पड़ती है, जिससे आर्थिक परेशानी भी होती है।
सबा खातून
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उच्च शिक्षण संस्थान अथवा तकनीकी शिक्षा की कोई सुविधा न होने के कारण इंटरमीडिएट के बाद उन्हें बाहरी शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे जहां एक तरफ आर्थिक परेशानी होती है, वहीं क्षेत्र के गरीब अभिभावक बच्चों को शिक्षा देने से वंचित रह जाते हैं।
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हर्ष कुमार
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इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त करने के बाद नातक करने के लिए बलरामपुर का रुख करना पड़ा। वहीं पर रहकर इस समय पढ़ाई कर रहा हूं, अगर उच्च शिक्षण संस्थान यहां खुल जाए तो पढ़ाई के लिए उचित होगा।
राजेंद्र कुमार यादव
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