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बाढ़ से हालात भयावह, जनजीवन प्रभावित

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सिद्धार्थनगर। लगातार बरसात और नेपाल से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से जिले में बाढ़ से हालात बिगड़ने लगे हैं। लिहाजा जनजीवन प्रभावित होने लगा है। नौगढ़-बांसी हाईवे पर जोगिया व ककरहीं सहित कई स्थानों पर तीन फीट तक पानी आने से आवागमन बंद कर दिया गया। नौगढ़-सोहांस मार्ग पर पानी दो फीट ऊपर तक चल रहा है। बाढ़ से सैकड़ों गांव घिर गए हैं।
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पीडब्ल्यूडी के मुताबिक एनएच समेत 18 मार्गों पर पानी लगा हुआ है। दर्जनों गांव संपर्क से कट गए हैं। मधुकरपुर 132/33 केवी पावर हाउस में पानी घुसने से बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बूढ़ी राप्ती लाल निशान से एक मीटर ऊपर बह रही है। घोघी और कूड़ा का जलस्तर भी लाल निशान के पार है। राप्ती बांसी पुल पर खतरे के निशान से महज 50 सेमी नीचे है। सबसे ज्यादा खतरा बानगंगा से है। पिछले साल भारी तबाही मचाने वाली इस पहाड़ी नदी के जलस्तर में सोमवार की सुबह से बेतहाशा वृद्धि हो रही है।
सुबह नदी का जलस्तर 92 मीटर था, जो अपराह्न तीन बजे तक 93.60 तक पहुंच गया। बैराज के सभी 16 फाटक खोलने के बावजूद जलस्तर बढ़ता ही जा रहा है। खतरे का निशान 94.18 मीटर है। रफ्तार यही रही तो शोहरतगढ़-बढ़नी हाईवे को बंद करना पड़ सकता है।
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सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी बारिश जारी रही। बाढ़ नियंत्रण कक्ष की रिपोर्ट के मुताबिक जोगिया के ककरहीं गेज स्टेशन पर सुबह आठ बजे तक 30 सेमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है। वहीं बांसी गेज स्टेशन पर भी 15 सेमी से अधिक बारिश हुई है। बारिश का यह हाल कमोवेश पूरे जिले में है। दिन पर रुक-रुक कर तेज बारिश जारी रही। बारिश के साथ ही नेपाल से भी लगातार भारी मात्रा में पानी आने से स्थिति भयावह होती जा रही है।
बुजुर्गों के मुताबिक इस अंचल में सबसे बड़ी बाढ़ वर्ष 1998 में आई थी। इसके बाद से पिछले दो दशक में यह दूसरा मौका है, जब स्थिति इतनी बदतर हुई है। बारिश और नेपाल से पानी आने का सिलसिला यही रहा तो हालात और बिगड़ेंगे।
उधर, लगातार बिगड़ती स्थिति के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई खास इंतजाम अब तक नजर नहीं आया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोग जान हथेली पर रखकर आवागमन को मजबूर दिखे। गांवों में घरों के अंदर कैद लोग छतों पर शरण लिए हुए हैं। उन्हें राहत पहुंचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं हुआ है। हालांकि डीएम कुणाल सिल्कू ने दावा किया है कि सभी एसडीएम को इस बारे में निर्देश दे दिए गए हैं। राहत पहुंचाने का कार्य भी शुरू हो गया है। बाढ़ से ज्यादा खराब स्थिति जलजमाव के चलते है। बारिश लगातार हो रही है, इससे पानी निकलने में दिक्कत है। हर हालात पर नजर रखी जा रही है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में वितरण के लिए खाद्य सामग्री के 5000 पैकेट्स बनाए गए हैं। राहत पहुंचाई जा रही है। दो मोटर बोट और छह बोट मंगा लिए हैं। आपात स्थिति में इसके जरिए रेस्क्यू किया जाएगा।

डीएम ने जारी किया अलर्ट, तत्काल सक्रिय करें बाढ़ चौकियां
सिद्धार्थनगर। जिलाधिकारी कुणाल सिल्कू ने सभी एसडीएम, तहसीलदार, बीडीओ और थानाध्यक्षों को बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए तत्काल इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि भारी वर्षा व नेपाल से अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने की सूचना मिल रही है। इससे नदियों के जल स्तर में वृद्धि हो रही है। ऐसे में बाढ़ की संभावना को देखते हुए बचाव आदि की तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित करें। बाढ़ आपदा कार्य में लगे अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में सतर्क रहें और तत्काल राहत व बचाव कार्य प्रारंभ कर दिए जाएं। बाढ़ शरणालय, बाढ़ राहत केंद्र, बाढ़ चौकियों को पूर्ण सक्रिय रखी जाए। नाव की पर्याप्त व्यवस्था समस्त तहसीलों के अंतर्गत सुनिश्चित करें। बाढ़ शरणालय में आए लोगों को आश्रय व खान-पान, चिकित्सा की समुचित व्यवस्था कराएं। किसी भी स्थिति में जन व पशु हानि न होने पाए। ड्रेनेज व सिंचाई निर्माण खंड के एक्सईएन को संवेदनशील स्थलों की निरंतर पेट्रोलिंग करने और मौके पर उपस्थित रहकर तटबंधों की समुचित व्यवस्था करने को कहा है।
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