सिद्धार्थनगर।अनुसूचित जाति व जनजाति के अपराध पीड़ितों को सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता राशि नहीं मिल पा रही है। वर्ष-2016 से अब तक 70 पीड़ित राशि के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पुलिस महकमा समाज कल्याण विभाग के सिर पर ठीकरा फोड़ रहा है। वहीं, समाज कल्याण विभाग द्वारा दलील दी जा रही है कि उसे केवल एक मामले की जानकारी है।
अनुसूचित जाति व जनजाति की सुविधा के लिए दलित उत्पीड़न कानून बनाया गया है। पीड़ित की ओर से केस दर्ज कराने के बाद मामले की जांच में सत्यता पाए जाने पर सहायता राशि देने की योजना शुरू की गई। इसमें अपराध के अनुसार सहायता राशि देने की व्यवस्था है। मगर विभागीय उदासीनता के चलते जिले में पीड़ितों को सहायता राशि नहीं मिल पा रही है। दो विभागों के फेर में पिछले तीन वर्षों से 70 से अधिक पीड़ित चक्कर काट रहे हैं। पुलिस विभाग की माने तो रकम फंसने का कारण समाज कल्याण विभाग है, क्योंकि रकम भेजने की जिम्मेदारी उसकी है। इस मामले में समाज कल्याण विभाग को कई बार पत्र भी भेजा जा चुका है।
तीन किस्तों में मिलती है सहायता राशि
विभागीय लोगों की माने तो सहायता राशि का भुगतान तीन किस्तों में किया जाता है। पहली किस्त एफआईआर दर्ज होने, दूसरी किस्त चार्जसीट और तीसरी किस्त का भुगतान न्यायालय में दोष सिद्ध होने पर दी जाती है।
अपराध के अनुसार मिलती है राशि
विभाग के अनुसार एससी/एसटी एक्ट के मामले मेें अपराध के आधार पर सहायता राशि दी जाती है। इसमें जाति सूचक शब्द का प्रयोग करने से लेकर हत्या, छेड़खानी, दुष्कर्म व बलवा जैसे अपराध पर राशि बढ़ जाती है। पुलिस विभाग के अनुसार सबसे कम राशि तीस हजार रुपये और अधिकतम राशि अपराध की गंभीरता के अनुसार तय की जाती है।
खाते में भेजी जाती है रकम
एफआईआर दर्ज होने के बाद पीड़ित का खाता नंबर, बैंक पासबुक की छाया प्रति के अलावा अन्य प्रमाण पत्र लिया जाता है। बाद में सहायता राशि बैंक खाते में भेजी जाती है।
बोले जिम्मेदार
- सहायता राशि के भुगतान के लिए कई बार संबंधित विभाग को पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन मामले को लटकाया जा रहा है।
-डॉ. धर्मबीर सिंह, एसपी, सिद्धार्थनगर।
हो चुका है भुगतान
हमारे यहां केवल एक मामला लंबित है। जिसका भुगतान कर दिया जाएगा। -----मीनाक्षी वर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी।