कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को अनुयायियों से गुलजार रही। दार्जिलिंग से आए बौद्ध अनुयायियों ने गंध कुटि पर बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक रीति रिवाज से विशेष प्रार्थना किया। इस दौरान अनुयायियों को बौद्ध भिक्षु ने उपदेश भी दिया।
प्रार्थना के बाद भिक्षु देवानंद ने कहा कि एक बार श्रावस्ती में भयंकर अकाल पड़ा था। कई लोग भूख से तड़पकर मर गए। सबसे चिंताजनक स्थिति उन माताओं की थी, जिनकी गोद में दुधमुंह बच्चे थे। उनके घर के पुरुष काल के गाल में समा चुके थे। बुद्ध को जब यह पता चला तो वह चिंतित हो गए। उन्होंने तत्काल धनवान लोगों की एक सभा बुलवाई और उनसे कहाकि आप इन माताओं और इनके बच्चों की रक्षा करें। वहां उपस्थित लोग बोले कि हमारे पास अनाज तो है, पर वह एक वर्ष ही चल पाएगा। इसमें से हमने दूसरों को अन्न दिया तो हमारा परिवार भूखों मर जाएगा। इस पर बुद्ध गंभीर होकर बोले कि आप लोग अपने स्वार्थ से ऊपर नहीं उठ पा रहे। क्या आपको विश्वास है कि आपके सदस्य की मृत्यु केवल अन्न न मिलने के कारण ही हो सकती है। आपको भविष्य के बारे में कैसे पता। यह सुनकर सभी ने अपने सिर नीचे कर लिए। इसके बाद बुद्ध बोले आज आप इनकी मिलकर सहायता करेंगे, तो अकाल जैसी इस विपत्ति से मुक्ति संभव है।