श्रावस्ती। चुनाव आयोग की ओर से विधानसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा की जा चुकी है। जबकि किसी भी दल ने अपने प्रत्याशी के नामों की घोषणा नहीं की है। इसके बाद भी चुनावी गुणा गणित लगाने वाले लोग इतिहास के आइने में देखकर कौन सी सीट इस बार किस पाले में जाएगी। इसकी चर्चा बाजारों व चाय-पान की दुकानों में करते लोग देखे जा रहे हैं।
चुनाव अधिसूचना जारी होने के साथ ही चुनावी गुणा गणित व भविष्य में आने वाले परिणाम पर भी चर्चा का दौर शुरू हो गया है। चौराहों पर बैठा हर व्यक्ति अपने पसंदीदा पार्टी व व्यक्ति के पक्ष में तर्क प्रस्तुत करता हुआ दिखता है। यहां तक कि कुछ चुनावी पंडित इतिहास के आइने में देख कर भविष्य में कौन से दल के सदस्य किस विधानसभा की रहनुमाई करेंगे इसका दावा प्रस्तुत कर रहे हैं। यदि चौराहों पर बैठे स्थानीय राजनीतिक पंडितों पर गौर करें तो विधानसभा के लिए हुए पहले आम चुनाव 1952 व 57 में भिनगा व इकौना विधानसभा के लिए संयुक्त मतदान हुआ था। इन दोनों चुनाव में कांग्रेस का परचम लहराया था।
1962 में स्वतंत्र पार्टी ने दोनों सीटों पर कांग्रेस को झटका दे दिया था। वहीं 67 के चुनाव में जनसंघ हीरो बन कर उभरी, लेकिन 69 में फिर से उप चुनाव हो जाने पर भिनगा में तो कांग्रेस की वापसी हो गई। जबकि इकौना विधानसभा क्षेत्र में जनसंघ ने अपना कब्जा कायम रखा। 1974 में स्थिति बदली। भिनगा में जनसंघ तो इकौना में कांग्रेस ने बाजी मारी। इसके बाद देश में आपात स्थिति लगने के बाद दोनों सीटों पर जनसंघ का कब्जा एक बार फिर हो गया।
इसके बाद 1980, 85 व 89 तक भिनगा में वोटरों ने निर्दल प्रत्याशियों पर भरोसा किया। जबकि 80 व 85 में इकौना में कांग्रेस व 89 में भाजपा का दबदबा रहा। 1991 से लेकर 2002 तक फिर सूरत बदली। राम मुद्दे के कारण दोनों सीटों पर भाजपा का कब्जा रहा। वहीं 2007 के विधानसभा चुनाव में वोटरों का मन फिर बदला। दोनों विधानसभाओं पर बसपा का परचम लहराने लगा। अब परिसीमन के बाद स्थितियां बदली-बदली नजर आ रही हैं।
इकौना विधानसभा का नाम बदल कर श्रावस्ती विधानसभा कर दिया गया। वहीं भिनगा विधानसभा में पूर्व चर्दा विधानसभा के कई कानूनगो सर्किल को जोड़ दिया गया है। इसी के बाद वर्ष 2012 में इकौना विधानसभा क्षेत्र आरक्षित के स्थान पर श्रावस्ती विधानसभा क्षेत्र सामान्य बना। जिस पर पहली बार सपा का कब्जा हुआ। वहीं भिनगा में भी सपा ने जीत हासिल की। इसके बाद वर्ष 2017 में जहां श्रावस्ती विधानसभा सीट भाजपा के खेमे में पहुंची तो भिनगा विधानसभा सीट पर बसपा काबिज हुई। इसी इतिहास के आइने में अटकलों का बाजार गर्म है। किस दल का किस सीट पर कब्जा होगा। यह तो समय के गर्भ में है। लेकिन चुनावी गुणा गणित लगाने वालों के लिए यह एक बेहतर मुद्दा बना हुआ है।