श्रावस्ती। हड़ताल के चलते सहकारी समितियों पर आवंटन के बाद भी खाद की उठान नहीं हो पा रही है। समितियों पर लटक रहे तालों के कारण रवी के सीजन में उर्वरक न मिल पाने से किसान परेशान हैं। धान काट कर सरसों व गेहूं आदि की बोआई करने के लिए खेत तैयार कर चुके किसानों को महंगे दाम पर निजी दुकानों से खाद खरीदनी पड़ रही है।
लंबित मांगों को लेकर साधन सहकारी समितियों पर तैनात सचिव व अन्य कर्मचारी 15 नवंबर तक हड़ताल पर हैं। इसके चलते समितियों पर ताले लटक रहे हैं। रवी के सीजन में किसानों को उर्वरक की किल्लत न हो इसके लिए सभी समितियों को खाद का आवंटन तो कर दिया गया लेकिन इसकी उठान नहीं हुई। केंद्रों पर पड़े ताले के कारण समितियों पर डीएपी न मिलने से परेशान किसानों को निजी दुकानों से महंगे दाम पर इसकी खरीद करना पड़ रही है।
प्राईवेट दुकान के सहारे खेती कर रहे किसान
जिले में देखा जाए तो कुल आवंटित उर्वरक का एक तिहाई ही साधन सहकारी समितियों तक पहुंचता है। जबकि दो तिहाई उर्वरक निजी सेक्टर से जुड़ी दुकानों पर भेजा जाता है। मौजूदा समय में जहां समितियों में ताले लटक रहे हैं वहीं प्राईवेट सेक्टर की दुकानों पर 500 एमटी डीएपी भेजी जा चुकी है। समितियों पर आने वाली उर्वरक का दोगुना से अधिक उर्वरक निजी दुकानों के माध्यम से बेचा जाता है। ऐसे में जिले के किसान निजी दुकानों के सहारे ही खेती करने को विवश हैं।
नहीं उठी पहली खेप
साधन सहकारी समितियों पर भेजी जाने वाली उर्वरक को बेचने के बाद मिले पैसे से ही उर्वरक की दूसरी खेप की उठान होती है। पंद्रह नवंबर से गेहूं की बोआई का काम तेजी पकड़ेगा। ऐसे में जब समितियों द्वारा पहली ही खेप नहीं उठाई गई तो दूसरी खेप के लिए किसानों को दिसंबर तक का लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। जिसका असर खेती किसानी पर पड़ेगा।
हड़ताल अवैध, भेजी जा रही डीएपी
शासन की ओर से हड़ताल को अवैध घोषित किया जा चुका है। आज से सभी समितियों पर डीएपी लेकर ट्रक पहुंच रहे हैं। जिले में डीएपी की कोई कमी नहीं है। एक हजार एमटी से अधिक डीएपी किसानों द्वारा खरीद कर सुरक्षित कर लिया गया है। ऐसे में गेहूं की बोआई के समय डीएपी का संकट नहीं होगा।
राज कुमार शुक्ला, सहायक आयुक्त/ सहायक निबंधक साधन सहकारी समिति